जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के लिए तो हमारे साइंटिस्ट काम कर ही रहे हैं, लेकिन मौसम के उतार-चढ़ाव से हमे खुद निपटना होगा. आज जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसमे एक दिन बाद और एक घंटे के बाद मौसम में होने वाले उतार-चढ़ाव के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है.अगर मौसम में नमी है तो हमे उसी वक्त खेत में बीज रोपने होंगे. अगर फसल पक चुकी है तो एक से दो दिन में फसल कट जानी चाहिए. वर्ना मौसम के उतार-चढ़ाव के चलते चार-पांच महीने की मेहनत एक दिन में बर्बाद हो सकती है. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में फार्म मशीनरी डिपार्टमेंट के हैड डॉ. विशाल का कहना है कि जलवायु परिवर्तन में तापमान 30 डिग्री से 32 हो जाएगा तो हम उसके हिसाब से तैयारी कर लेंगे.
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