उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के खेतों में अब बैल नहीं दिखते हैं. उनकी जगह अब ट्रैक्टर ने ले ली है. बैलों को पीछे कर अब ट्रैक्टर खेती-किसानी का नया प्रतीक बन गया है. लेकिन महाराष्ट्र में कुछ अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है. यहां के अधिकांश क्षेत्रों में बैल से खेती करते हुए किसान दिख रहे हैं. हालांकि, ट्रैक्टर का दबदबा यहां भी दिख रहा है, लेकिन दूसरे राज्यों से अलग हटकर यहां के किसानों की नजर में अब भी खेती के लिए बैल जरूरी हैं. खासतौर पर छोटे किसानों के लिए. यहां तो अब भी बैलों को इतना महत्व है कि हर साल अगस्त या सितंबर में बैल पोला त्योहार मनाया जाता है. जिसमें बैलों को खूब सजाकर उन्हें अच्छे से खिलाया-पिलाया जाता है.
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