
राजस्थान के बीकानेर में डॉ. शिव दर्शन मलिक ने गाय के गोबर, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों के मिश्रण को बनाकर एक वैदिक प्लास्टर और गोक्रीट ईंटें तैयार की हैं.

शिव दर्शन मलिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन में कंक्रीट का मुख्य रोल होता है और वैदिक प्लास्टर और गोक्रीट ईंट को इसके विकल्प के तौर पर हमने कई वर्षों के गहन अध्ययन के बाद तैयार किया है.

कंक्रीट और सीमेंट आदी से बड़ी मात्रा में कार्बन फुटप्रिंट पैदा होता है और इससे बहुत मलबा निकलता है जिसको कि रिसाइकिल भी नहीं किया जा सकता है.

डॉ. शिव दर्शन मलिक बताते हैं कि वैदिक प्लास्टर, गोक्रीट ईंट से बने घर ऑक्सीजन को अब्जॉर्ब करते हैं. जिससे कि यह गर्मियों में भी ठंडे रहते हैं. साथ ही गोक्रीट ईंटें 70 फीसदी तक हीट रेडिएशन को रोक सकती हैं.

डॉ. शिव दर्शन मलिक वैदिक प्लास्टर और गोक्रीट ईंटें बनाने के ट्रेनिंग भी देते हैं. देशभर से अभी तक वो हजारों लोगों को इसे बनाने की ट्रेनिंग भी दे चुके हैं. यहां आने वाले लोग सीखने के दौरान खुद ही इन ईंटों को बनाते भी हैं.

डॉ. शिव दर्शन मलिक को वैदिक प्लास्टर (Vedic Plaster) के आविष्कार के लिए, वर्ष 2019 में राष्ट्रपति की ओर से ‘हरियाणा कृषि रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

डॉ. शिव दर्शन मलिक बताते हैं कि वैदिक प्लास्टर और वैदिक ब्रिक्स से घर बनाने में सीमेंट से बने घर के मुकाबले 6 से 7 गुना पैसे की बचत होती है.गोबर से बनी ईंट का वजन करीब 1.78 किलो तक होता है और इसको बनाने में चार रुपए प्रति ईंट खर्च आता है.
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