पराली जलाए बिना बुवाई में मदद करेगी MaxSeederमहिंद्रा एंड महिंद्रा ने खेती को आसान बनाने और पराली जलाने की समस्या कम करने के लिए अपनी नई मशीन MaxSeeder का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है. यह मशीन खेत में धान की पराली को हटाए बिना गेहूं और दूसरी फसलों की बुवाई करने में मदद करेगी. इससे किसानों को खेत तैयार करने में कम मेहनत करनी पड़ेगी. साथ ही, बीज, खाद, डीजल और मजदूरी पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है. कंपनी ने इस मशीन को कनाडा की Clean Seed Technologies की तकनीक के लाइसेंस के तहत तैयार किया है. इसका उत्पादन मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित महिंद्रा के विशेष कृषि मशीनरी प्लांट में किया जा रहा है.
MaxSeeder एक आधुनिक जीरो-टिल यानी बिना जुताई के बुवाई करने वाली मशीन है. इसकी मदद से किसान धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली के बीच सीधे अगली फसल के बीज बो सकते हैं. आमतौर पर धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करना पड़ता है. कई जगह किसान खेत से पराली हटाने या उसे जलाने का रास्ता अपनाते हैं. लेकिन इस मशीन की मदद से खेत में कम छेड़छाड़ करके बुवाई की जा सकती है. इससे पराली जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है और मिट्टी को भी कम नुकसान पहुंचता है.
MaxSeeder मशीन को कई तरह की फसलों की बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इससे गेहूं, धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की बुवाई की जा सकती है. मशीन में फसल के हिसाब से कतारों के बीच की दूरी बदली जा सकती है. इसकी मदद से किसान अपने खेत और फसल की जरूरत के अनुसार बुवाई का तरीका तय कर सकते हैं. मशीन में पांच अलग-अलग बुवाई यूनिट दी गई हैं. इनकी मदद से अलग-अलग फसलों के लिए बुवाई की व्यवस्था बदली जा सकती है. इससे एक ही मशीन का इस्तेमाल कई तरह की फसलों में करना आसान होता है. किसान को अलग-अलग काम के लिए बार-बार दूसरी मशीनों पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हो सकती है.
MaxSeeder की खास बात यह है कि यह खेत में बीज और खाद डालने का काम ज्यादा सटीक तरीके से कर सकती है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) दी गई है, जो खेत की जरूरत के हिसाब से बीज, डीएपी और यूरिया की मात्रा तय करने में मदद करती है. इस सिस्टम को मोबाइल ऐप के जरिए भी नियंत्रित किया जा सकता है. मशीन में एक खास उपकरण दिया गया है, जो बीज की कतार से करीब डेढ़ इंच नीचे यूरिया डालता है. इससे खाद पौधे की जड़ों के पास पहुंचने में मदद मिलती है. सही जगह खाद डालने से उसके बेहतर इस्तेमाल की संभावना बढ़ती है और खाद की बर्बादी कम हो सकती है. इससे किसानों को खेती की लागत घटाने में मदद मिल सकती है.
महिंद्रा के मुताबिक, MaxSeeder को चलाने के लिए बहुत ज्यादा ताकत वाले ट्रैक्टर की जरूरत नहीं है. इसे 35 हॉर्स पावर (HP) या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है. इससे उन किसानों के लिए भी आधुनिक बुवाई तकनीक अपनाना आसान हो सकता है, जिनके पास बहुत ज्यादा HP वाला ट्रैक्टर नहीं है. कम क्षमता वाले ट्रैक्टर के साथ मशीन का इस्तेमाल करने की सुविधा से किसानों को नई मशीन खरीदने के साथ बड़े ट्रैक्टर पर अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत कम हो सकती है. हालांकि, मशीन की वास्तविक लागत और बचत खेत की स्थिति, फसल और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगी.
खेत में बुवाई से पहले कई बार जुताई और दूसरी तैयारी करनी पड़ती है. MaxSeeder की जीरो-टिल तकनीक से इन कामों की जरूरत कम हो सकती है. इससे किसान कम समय में बुवाई पूरी कर सकते हैं. खेत की तैयारी में कम चक्कर लगाने से डीजल और मजदूरी पर होने वाला खर्च भी घट सकता है. समय पर बुवाई करना किसानों के लिए बहुत जरूरी है, खासकर धान की कटाई के बाद गेहूं की फसल लगाने के दौरान. ऐसे में यह मशीन किसानों को बुवाई के लिए मिलने वाले कम समय का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद कर सकती है. इससे खेती के काम को ज्यादा तेजी और आसानी से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
कंपनी के अनुसार, MaxSeeder का पंजाब और हरियाणा में खेतों पर परीक्षण किया गया है. इन परीक्षणों में मशीन ने धान की भारी पराली के बीच भी बीज बोने की क्षमता दिखाई. कंपनी का कहना है कि मशीन मिट्टी को कम छेड़ते हुए बुवाई कर सकती है और बीज तथा खाद जैसे कृषि संसाधनों के इस्तेमाल को बेहतर बनाने में मदद करती है. धान की कटाई के बाद पराली जलाना उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह रहा है. ऐसे में पराली के बीच सीधे बुवाई करने वाली मशीनें किसानों को दूसरा विकल्प दे सकती हैं. हालांकि, इसका फायदा खेत की स्थिति, पराली की मात्रा और मशीन के सही इस्तेमाल पर निर्भर करेगा.
महिंद्रा ने बताया कि MaxSeeder की बिक्री कंपनी के कृषि उपकरण डीलरों के जरिए की जाएगी. इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से होगी. इसके बाद किसानों की जरूरत के अनुसार दूसरे इलाकों में भी मशीन उपलब्ध कराने की योजना है. महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नाकरा के मुताबिक, कंपनी का उद्देश्य किसानों तक आधुनिक और टिकाऊ खेती की मशीनें पहुंचाना है. वहीं, Clean Seed Technologies के चेयरमैन और सीईओ ग्रेम लेम्पियर ने मशीन का उत्पादन शुरू होने को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.
MaxSeeder का मुख्य उद्देश्य खेती में लगने वाले समय और खर्च को कम करने के साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को घटाने में मदद करना है. इससे किसान धान की पराली के बीच सीधे बुवाई कर सकते हैं, बीज और खाद का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और खेत तैयार करने के कई काम कम कर सकते हैं. अब यह देखना अहम होगा कि अलग-अलग राज्यों और खेतों में इसके इस्तेमाल से किसानों को कितनी वास्तविक बचत होती है और यह मशीन पराली जलाने की समस्या को कम करने में कितनी मददगार साबित होती है.
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