करनाल के किसान अब पराली जलाने की जगह मशीनों से उसका प्रबंधन कर रहे हैं. किसान बक्शी लाल ने बताया कि सरकार की 50% सब्सिडी से मिले सुपर सीडर और एसएमएस मशीनों से पराली खेत में मिलाने से मिट्टी उपजाऊ होती है और पर्यावरण प्रदूषण घटता है.
इस बार किसानों को भारी बारिश और बाढ़ से नुकसान झेलना पड़ा है. इसे देखते हुए हरियाणा सरकार ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर नुकसान का ब्योरा दर्ज कराने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी है. जिन किसानों ने ब्योरा दर्ज नहीं किया है, वे जल्द करें.
भाारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति में फसलों का नुकसान बड़ी समस्या है. हरियाणा में किसान भी फसल नुकसान से जूझ रहे हैं. इसे देखते हुए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को 15 सितंबर तक खुला रखा गया है ताकि किसान नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन दे सकें.
हरियाणा के कृषि विभाग ने एक फरमान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि कोई भी हार्वेस्टर मालिक कंबाइन में सुपर एसएमएस मशीन लगाए बिना धान की कटाई नहीं करेगा. साथ ही कोई किसान बिना एसएमएस मशीन वाला कंबाइन हार्वेस्टर अपने खेत में कटाई के लिए इस्तेमाल नहीं करेगा.
DSR Technology: हरियाणा के करनाल में धान की सीधी बिजाई से किसानों की बढ़ रही कमाई. किसानों ने बताया कि धान की सीधी बिजाई से वे पानी की बचत करते हैं और लेबर की भी जरूरत नहीं पड़ती. इससे उनकी लागत कम आती है.
Haryana Crop Compensation: भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हरियाणा के 7 जिलों के 188 गांवों के किसानों को मुआवज़ा दिलाने के लिए सीएम नायब सिंह सैनी ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 31 अगस्त 2025 तक खोलने का ऐलान किया है. किसान ऑनलाइन फसल नुकसान दर्ज कर मुआवज़ा क्लेम कर सकेंगे.
हरियाणा में एग्रीस्टैक सेल शुरू होगा जिससे किसान रजिस्ट्री और डिजिटल फसल सर्वे के काम में तेजी आएगी. इन दोनों काम से किसानों को मदद मिलेगी क्योंकि फसल सर्वे जितनी जल्दी होगी, किसानों को उतनी ही आसानी से मुआवजा मिलेगा.
Driverless Tractor: हरियाणा के करनाल के युवा किसान बीर विर्क ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तीन ट्रैक्टरों को ड्राइवरलेस बना दिया है. GNSS सिग्नल और iPad कमांड से चलने वाले ये ट्रैक्टर सटीकता से खेत में काम करते हैं और दूसरे खेत में नहीं जाते. इससे समय, डीजल की बचत होती है और सामान्य किसान भी इन्हें आसानी से चला सकते हैं.
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को किसानों से कृषि के व्यवसायीकरण के लिए नई तकनीकों और आधुनिक तरीकों को अपनाने का आग्रह किया है. उन्होंने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. हरियाणा सरकार की ओर से समझौता ज्ञापन पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजा शेखर वुंडरू ने हस्ताक्षर किए.
बीकेएस के महासचिव रामबीर सिंह चौहान ने कहा, "किसानों के लिए सौर पैनलों की सुरक्षा करना संभव नहीं है, क्योंकि ये अक्सर खेतों से चोरी हो जाते हैं. सरकार को उन्हें सौर ऊर्जा पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करने के बजाय पहली प्राथमिकता पर ट्यूबवेल के लिए बिजली कनेक्शन जारी करने पर ध्यान लगाना चाहिए."
इस नई तकनीक में जमीन या खेत की मदद लिए बिना हवा में फसल उगाई जा सकती है. इसके तहत बड़े-बड़े बॉक्स में आलू के पौधों को लटका दिया जाता है. इस तकनीक से पैदा हुए बीज में किसी तरह की बीमारी नहीं होती, इसलिए पौधे भी पूरी तरह से स्वस्थ होते हैं. बॉक्स में लटके हुए आलू की जड़ों पर ही सभी तरह के पोषक तत्व दिए जाते हैं.
आजकल देश के किसानों को परंपरागत खेती को छोड़कर तकनीकी खेती से जोड़ा जा रहा है. इससे किसानों का उत्पादन बढ़ा है और कमाई भी बढ़ी है. हालांकि जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे फसल में बीमारियों का प्रकोप भी लगातार बढ़ रहा है.
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने अब तक ज्वार की 13 नई किस्में तैयार की हैं जिनमें तीन वैरायटी नई हैं. ये तीन नई वैरायटी ऐसी हैं जो चारे के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं. नई किस्म के ज्वार में प्रोटीन के साथ अन्य पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है. इसे पचाने में पशुओं को आसानी भी रहती है.
हरियाणा के चरखी दादरी में बुजुर्ग दंपति ने जल संरक्षण के लिए ऐसा काम किया लोग देखते रह गए. इस बुजुर्ग दंपति ने महज तीन साल में ही पहाड़ की चोटी पर कुंड बना दिया जिससे पहाड़ों में जीव-जंतुओं को पानी मिल रहा है. 87 साल की उम्र में ऐसी लगन, दो किमी की चढ़ाई कर पहाड़ पर असंभव को संभव कर दिखाया.
हरियाणा में धान बुआई के लिए डीएसआर तकनीक शुरू की गई है. इसमें धान की सीधी बिजाई की जाती है. धान का बिचड़ा तैयार करने की जरूरत नहीं होती. इससे पानी की बचत होती है. इस अभियान को तेज करने के लिए हरियाणा सरकार किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ का इंसेन्टिव दे रही है.
गिर गाय की क्लोनिंग पर वैज्ञानिकों की टीम पिछले दो साल से काम कर रही थी. इस टीम में डॉ. नरेश सेलोकर, मनोज कुमार सिंह, अजय असवाल, एस.एस. लठवाल, सुभाष कुमार, रंजीत वर्मा, कार्तिकेय पटेल और एमएस चौहान शामिल रहे. टीम के सभी वैज्ञानिक और डॉक्टर क्लोन गायों के उत्पादन के लिए स्वदेशी विधि विकसित करने के लिए काम करते रहे हैं.
ड्रोन पायलट बनने के लिए निशा सोलंकी ने लिक से हटकर काम किया. इसी की बदौलत उन्हें दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में ड्रोन फेस्टीवल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला. निशा सोलंकी का कहना है कि उनका एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग करने के पीछे मुख्य मकसद था कि किसानों को नई-नई तकनीकों से जोड़ा जाए.
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