किसान इस समय गर्मी यानी जायद में बोई जाने वाली मूंग की बुवाई कर सकते हैं. मूंग जैसी दलहनी फसलों की बुवाई से यह फायदा होता है कि यह खेत में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ाती हैं, जिससे दूसरी फसलों से भी बढ़िया उत्पादन मिलता है. मूंग की फसल के लिए ज्यादा बारिश नुकसानदायक होती है, ऐसे क्षेत्र जहां पर 60-75 सेमी तक वार्षिक बारिश होती है, मूंग की खेती वहां के लिए उपयुक्त होती है. मूंग की फसल के लिए गर्म जलवायु की जरूरत पड़ती है. मूंग की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में सफलतापूर्वक की जाती है, लेकिन मध्यम दोमट, मटियार भूमि समुचित जल निकास वाली, जिसका पीएच मान 7-8 हो इसके लिए उत्तम होती है.
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