
अकोला में फसल नुकसान का सर्वे शुरूमहाराष्ट्र की 265 सूखाग्रस्त तहसीलों में खरीफ फसलों को हुए नुकसान का पंचनामा शुरू हो गया है. अकोला जिले में प्रशासन ने इस प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है. अब अधिकारी खेत में पहुंचकर किसान की मौजूदगी में फसल नुकसान का सर्वे कर रहे हैं और पंचनामे में दर्ज जानकारी पर संबंधित किसान की सिग्नेचर भी ली जा रही है.
इस व्यवस्था से किसान यह देख सकेगा कि उसके खेत में कितने क्षेत्र की फसल का नुकसान दर्ज किया गया है और पंचनामे में अधिकारियों ने नुकसान के बारे में क्या जानकारी लिखी है. पहले पंचनामे पर सरपंच या पुलिस पाटिल की सिग्नेचर ली जाती थी, लेकिन अब संबंधित किसान की सिग्नेचर को भी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है.
अकोला के बोरगांव मंजू और सोनाला गांव में राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर किसानों के सामने फसल नुकसान का आकलन कर रही हैं.
बोरगांव मंजू और सोनाला गांव में बारिश के लंबे अंतराल ने सोयाबीन की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है. कहीं पौधे पूरी तरह मुरझा चुके हैं तो कहीं फसल जलने जैसी स्थिति में पहुंच गई है.
इन्हीं खेतों में राजस्व विभाग की टीमें नुकसान का पंचनामा तैयार करने पहुंच रही हैं. अधिकारी खेत और फसल की स्थिति देखने के बाद नुकसान से संबंधित जानकारी कागज पर दर्ज कर रहे हैं. इस दौरान संबंधित किसान मौके पर मौजूद रहता है. जानकारी दर्ज करने के बाद किसान उसे देखता है और फिर पंचनामे पर उसकी सिग्नेचर ली जाती है.
बोरगांव मंजू के किसान निकेत शेंडे ने अपने खेत में सोयाबीन की बुवाई की थी. करीब 50 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण उनकी फसल सूखकर बर्बाद होने लगी है.
निकेत के खेत में तहसील, मंडल अधिकारी और तलाठी की टीम पहुंची. अधिकारियों ने फसल का जायजा लिया और नुकसान से संबंधित जानकारी पंचनामे में दर्ज की. इसके बाद किसान से उस पर सिग्नेचर कराई गई.
निकेत शेंडे का कहना है कि पहले सर्वे के दौरान किसान मौके पर मौजूद है या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रहती थी. कार्यालय पहुंचने के बाद पंचनामे में क्या जानकारी दर्ज है, इसका भी किसान को पता नहीं चलता था. अब अधिकारी खेत में आकर किसान के सामने नुकसान देख रहे हैं और जो जानकारी लिखी जा रही है, उस पर किसान की सिग्नेचर भी ली जा रही है. निकेत के मुताबिक इससे सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाई दे रही है.
सोनाला गांव के किसान उमाकांत ने करीब 10 हेक्टेयर में सोयाबीन और कपास की बुवाई की थी. सोयाबीन की उन्हें दोबारा बुवाई भी करनी पड़ी, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण फसल फिर बर्बादी की कगार पर पहुंच गई.
अधिकारियों ने उमाकांत के खेत में पहुंचकर फसल की स्थिति का जायजा लिया और उनके सामने नुकसान दर्ज किया. पंचनामा पूरा होने के बाद उस पर उमाकांत की सिग्नेचर ली गई.
उमाकांत का कहना है कि सरकारी सहायता कब मिलेगी, यह आगे की बात है, लेकिन फिलहाल उन्हें यह पता चल रहा है कि खेत के नुकसान के बारे में सरकारी रिकॉर्ड में क्या लिखा जा रहा है. जानकारी सही होने की तस्दीक करने के बाद किसान खुद उस पर सिग्नेचर कर रहा है.
उनके मुताबिक इस व्यवस्था से किसान को भरोसा मिलता है कि उसकी मौजूदगी में दर्ज जानकारी पर उसकी सिग्नेचर है और बाद में उसमें बदलाव नहीं होना चाहिए.
सोनाला गांव के किसान संजय इल्लेकर की कहानी फसल नुकसान की गंभीरता को दिखाती है. संजय के पास करीब पांच एकड़ जमीन है. उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सोयाबीन की अच्छी फसल होगी. फसल बेचने से मिलने वाले पैसे से उन्होंने बेटी की शादी करने की योजना बनाई थी.
लेकिन बारिश नहीं होने के कारण फसल बर्बाद हो गई और इसके साथ उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया.
जब अधिकारी संजय के खेत में नुकसान का पंचनामा करने पहुंचे तो उन्होंने खेत की स्थिति दिखाई. अधिकारियों ने नुकसान दर्ज किया और तैयार पंचनामे पर संजय की सिग्नेचर ली.

अपनी सूखी फसल दिखाते हुए संजय भावुक हो गए. उनका कहना है कि फसल से उन्हें बहुत उम्मीद थी, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण पूरी फसल बर्बाद हो गई और बेटी की शादी से जुड़े उनके सपनों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है.
अकोला जिलाधिकारी वर्षा मीणा के अनुसार, पंचनामे की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है. किसान की सिग्नेचर होने से खेत में दर्ज की गई जानकारी उसके संज्ञान में रहेगी.
इस व्यवस्था का एक उद्देश्य यह भी है कि बाद में किसान यह शिकायत न करे कि संबंधित अधिकारी ने उसके खेत में पहुंचे बिना या कार्यालय में बैठकर ही नुकसान का आकलन कर दिया.
यानी अब सरकारी रिकॉर्ड में फसल नुकसान दर्ज होने से पहले किसान स्वयं जानकारी देख सकेगा और उस पर अपनी सिग्नेचर करेगा.
अकोला के खेत इस समय दो अलग-अलग तस्वीरें दिखा रहे हैं. एक तरफ बारिश के इंतजार में सूख चुकी सोयाबीन है और अपनी मेहनत बर्बाद होते देख परेशान किसान हैं. दूसरी तरफ राजस्व विभाग की टीमें उन्हीं खेतों में पहुंचकर नुकसान का सरकारी रिकॉर्ड तैयार कर रही हैं.
पंचनामे पर किसान की सिग्नेचर की यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, इसका असर आगे की प्रक्रिया और किसानों को मिलने वाली सहायता के बाद सामने आएगा. फिलहाल किसानों के लिए इस बदलाव का सबसे अहम पहलू यह है कि उनके खेत में हुए नुकसान के बारे में सरकारी कागज पर क्या लिखा जा रहा है, इसकी जानकारी अब उन्हें मौके पर ही मिल रही है.
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