
PM Kisan योजना की 22वीं किस्त आने वाली है. किसानों में कई दिन से इसका इंतजार है. ऐसी अपुष्ट खबरें हैं कि होली के ठीक बाद खाते में 2000 रुपये आ जाएंगे. हालांकि सरकार ने अभी तक तारीख को लेकर कुछ भी ऐलान नहीं किया है. इन तमाम असमंजस के बीच कई किसान ऐसे भी हैं जिनकी शिकायत है कि वे स्कीम के लिए योग्य हैं, लेकिन उन्हें 2000 रुपये नहीं मिलते. इन किसानों का सवाल है कि आखिर वे पीएम किसान योजना से बाहर क्यों हैं जब वे पात्र हैं?
आइए जान लेते हैं कि आखिर योग्य किसान पीएम किसान स्कीम से बाहर क्यों हो जाते हैं? क्या फेल KYC और गलत रेवेन्यू रिकॉर्ड इसकी बड़ी वजह हैं?
जानकार बताते हैं कि केवाईसी न होना, जमीन के रिकॉर्ड में कुछ खामी के अलावा भी कई कारण हैं जो किसी योग्य किसान को PM Kisan के दायरे से बाहर कर देते हैं. जैसे, ग्रामीण इलाकों में गलत नाम/खसरा/खतौनी से जुड़े केस. महिलाएं/बुजुर्ग किसानों को ई-केवाईसी में दिक्कत आदि. किसी भी किसान के लिए e-KYC सबसे बड़ी और पहली जरूरत है, तभी पीएम किसान का लाभ मिल सकेगा.
पीएम किसान स्कीम का लाभ लेने के लिए लाभार्थी किसान का नाम लैंड रिकॉर्ड में होना चाहिए. ये भी जरूरी है कि नाम सही होना चाहिए. अगर नाम गलत है तो पीएम किसान की लाभार्थी सूची में नाम नहीं आएगा और किस्त का लाभ भी नहीं मिलेगा. रेवेन्यू रिकॉर्ड में नाम के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना जरूरी है. एक बार फार्मर रजिस्ट्री होने के बाद फार्मर आईडी बन जाएगी जिसके आधार पर रेवेन्यू रिकॉर्ड में सही नाम दर्ज हो जाएगा. इससे पीएम किसान का लाभ लेना पक्का हो जाएगा. अगर आप यूपी के किसान हैं तो नीचे बताए गए स्टेप से खुद ही फार्मर रजिस्ट्री कर सकते हैं.
खसरा या खतौनी में अपना नाम जरूर चेक करें. अगर नाम गलत है तो पहले उसे सुधरवा लें क्योंकि गलत नाम आपको पीएम किसान की किस्त लेने में बाधा बनेगी. ग्रामीण इलाकों में यह गलती सबसे आम है जिस पर ध्यान नहीं जाता. यह ऐसी गलती है जिसकी वजह से कोई योग्य किसान भी पीएम किसान की सुविधा से वंचित हो जाता है. इसके अलावा, बुजुर्ग महिला या पुरुष किसानों की ई-केवाईसी में तकनीकी दिक्कत आती है. बायोमेट्रिक अपडेट होने में सबसे बड़ी बाधा आती है क्योंकि अंगुलियों के निशान हल्के हो जाते हैं. पीएम किसान स्कीम का लाभ लेने के लिए इस तकनीकी दिक्कत को भी दूर करना जरूरी है.