सेब को लेकर किसानों का सचिवालय घेराव, 14 सूत्रीय मांगों के साथ किया चक्का जाम

सेब को लेकर किसानों का सचिवालय घेराव, 14 सूत्रीय मांगों के साथ किया चक्का जाम

न्यूजीलैंड से सेब आयात पर ड्यूटी 50% से घटाकर 25% किए जाने के विरोध में हिमाचल किसान मंच और सेब बागवानों ने शिमला में राज्य सचिवालय का घेराव किया. किसानों ने FRA लागू करने समेत 14 सूत्रीय मांगों के साथ चक्का जाम कर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

Himachal Farmers ProtestHimachal Farmers Protest
विकास शर्मा
  • Shimla,
  • Jan 20, 2026,
  • Updated Jan 20, 2026, 4:17 PM IST

शिमला में सोमवार को कैबिनेट बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश किसान मंच और सेब उत्पादक संघ ने राज्य सचिवालय का घेराव किया गया. प्रदेश सचिवालय के बाहर प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारी न्यूजीलैंड से सेब आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी घटने के विरोध में राज्य सचिवालय के बाहर पहुंचे थे. इस दौरान प्रदर्शनकारी FRA को प्रभावी ढंग से लागू करने समेत 14 मांगे लेकर राज्य सचिवालय पहुंचे. केंद्र और राज्य सरकार का विरोध जताते हुए प्रदर्शनकारियों ने राज्य सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया.

पूर्व CPI(M) विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार देश और हिमाचल प्रदेश के अंदर गरीब किसान की परवाह नहीं कर रही. अपनी मांगों को लेकर किसान यह आंदोलन जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि किसान सरकार की मजबूरियां समझता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि किसानों का जीवन यापन समाप्त कर दिया जाए. 

किसानों की 14 सूत्रीय मांग

राकेश सिंघा ने कहा कि किसान 14 सूत्रीय मांग पत्र लेकर सचिवालय के बाहर पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार ने दूध का समर्थन मूल्य दिया, लेकिन किसानों तक नहीं पहुंच रहा. SJVNL पर भी आरोप लगाते हुए उन्होंने निगम को प्रदेश का दुसरा लुटेरा बताया. इस दौरान उन्हें स्मार्ट मीटर बंद करने की भी मांग उठाई. उन्हें कहा कि किसान बिल नहीं चुका पा रहे हैं. राकेश सिंघा ने कहा कि MIS के तहत मिलने वाला 1500 करोड़ आज बंद हो गया है, राज्य और केंद्र दोनों सरकार दोषी हैं.

सरकार पर किसानों का आरोप

वहीं राज्य सचिवालय का घेराव करने शिमला पहुंचे बागवानों का कहना है कि हिमाचल सरकार को किसान बागवानों से कोई सरोकार नहीं है. बीते कुछ सालों से राज्य में आपदा एक बड़ी त्रासदी लेकर आई है. किसान बागवानों के मकान, जमीन, खेती और बागवानी की भूमि सब आपदा में चल गए. ऐसे में सरकार की तरफ से राहत के तौर पर 7 लाख रुपये नया मकान देने की घोषणा की गई थी. लेकिन ऐसे लाखों परिवार हैं जिनके पास अब कोई भूमि ही नहीं बची तो मकान कहां से बनाए जाएंगे. 

दूध के अच्छे दाम नहीं

किसानों ने कहा कि दूध के अच्छे दाम भी अमूल जैसी बड़ी कंपनियों को ही मिल रहे हैं. जबकि राज्य के दूध उत्पादक परिवार आज भी अच्छे दाम मिलने की राह देख रहे हैं. किसान के बच्चे आज भी दूध पीने से महरूम हैं. इसके साथ ही 5 बीघा तक की जमीन देने की बात कही जा रही थी लेकिन अभी तक किसान अपने हक की जमीन से वंचित हैं. 

सेब किसानों की हालत खराब

वहीं न्यूजीलैंड के सेब पर से आयात शुल्क घटाने से भी सेब की आर्थिकी बुरी तरह प्रभावित हो रही है. हाल ही में न्यूजीलैंड के सेब पर से आयात शुल्क 50 फीसदी से घटाकर इसे 25 फीसदी किया गया है. इसका सीधा नुकसान हिमाचल के बागवान का होगा जिससे उनका सेब बाजार में बेहद कम दाम में बिकेगा. इस फैसले के बाद सेब बागवानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि पहले ही सब की पैदावार में लगने वाली दवाइयां, खाद जैसी जरूरी चीजें महंगी मिल रही हैं.

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