छत्तीसगढ़ में आज भी देसी भट्ठों पर पारंपरिक तरीके से ईंटें बनाई जा रही हैं, जहां आधुनिक मशीनों की जगह हाथों से मेहनत कर ईंट तैयार की जाती है. ईंट बनाने के लिए साफ और अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है. इस मिट्टी में धान की भूसी और बालू मिलाकर सही मिश्रण तैयार किया जाता है, जिससे ईंट मजबूत बनती है। तैयार ईंटों को पहले खुले मैदान में करीब 15 दिनों तक सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें भट्ठे में पकाने के लिए डाला जाता है. भट्ठे में ईंट पकाने के लिए ईंधन के रूप में धान की भूसी का उपयोग किया जाता है, जिससे लागत कम रहती है. इस काम में लगे मजदूरों को दिन भर की मेहनत के बदले लगभग 700 रुपये मजदूरी मिलती है. देसी भट्ठे न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में रोजगार का साधन हैं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और पारंपरिक हुनर को भी जिंदा रखे हुए हैं.