देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और किल्लत के बीच बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक स्थित गजपतिपुर गांव के एक किसान दंपती ने इसका स्थायी समाधान निकाल लिया है. आगा खान फाउंडेशन की मदद से उन्होंने अपने घर पर मात्र आठ हजार रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट लगाया है. इसे चलाने के लिए प्रतिदिन 30 किलो गोबर और 60 लीटर पानी की आवश्यकता होती है. सूर्य की रोशनी से गैस तैयार होती है, जिससे उनके घर का खाना बनता है. इस बायोगैस प्लांट के कारण उन्हें अब साल भर में लगने वाले 10 से 12 एलपीजी सिलेंडर नहीं खरीदने पड़ते, जिससे 12 से 14 हजार रुपये की बचत हो रही है. इसके अलावा, प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग खेतों में जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है. इससे यूरिया जैसे रासायनिक खादों पर निर्भरता खत्म हो गई है। यह तकनीक सुरक्षित है और पशुपालक किसानों के लिए मुफ्त ईंधन और खाद प्राप्त करने का एक बेहतरीन विकल्प बन गई है.