बिहार के मिथिलांचल में मखाना सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी है. लेकिन जिस मखाने की कीमत बाजार में हजारों रुपये किलो तक पहुंचती है, उसे तैयार करने वाले कारीगर आज भी संघर्ष कर रहे हैं.