“जब राष्ट्रपति भवन में चांदी के बर्तनों में भोजन परोसा गया, तो कुछ क्षणों के लिए मुझे ऐसा लगा मानो मैं सपना देख रही हूं. यकीन ही नहीं हो रहा था कि खेती-बाड़ी करने वाली एक साधारण महिला किसान को इतना सम्मान मिल सकता है कि देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ बैठकर वे भोजन कर सकती हैं या उनसे मिल सकती हैं. ये बातें बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली अंजू कुमारी ने 'किसान तक' से बातचीत में साझा की.