मध्य प्रदेश के बैतूल के चोपना इलाका आजकल काफी चर्चा में है. क्योंकि कभी से पुर्नवास कैंप हुआ करता था. लेकिन आज ये विकास की कहानी सुना रहा है. यहां रह रहे लोगों ने कड़ी मेहनत के दम पर बिना किसी सरकारी मदद के विकास की नई इबारत लिखी है. दरअसल बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए रिफ्यूजियो को यहां पुनर्वास के लिए 4-4 एकड़ जमीन दी थी. जमीन बंजर थी. हर और जंगल था. लेकिन इन रिफ्यूजियों ने हिम्मत नहीं हारी. पथरीली जमीन को ऐसा बना दिा कि आज ये लोग खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए रिफ्यूजियों ने ऐसी हरित क्रांति लाई की आज उनकी हर जगह तारीफ हो रही है.