
India Meteorological Department के अनुसार 6 अप्रैल को राजस्थान, बिहार और झारखंड में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने बताया कि लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका असर 7 और 8 अप्रैल को सबसे अधिक रहेगा. कश्मीर घाटी में 7 अप्रैल को कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है. गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया गया है. साथ ही, 9 अप्रैल तक मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत में गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. इस दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य या उससे कम रहने का अनुमान है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है.
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) सोमवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के पास एक आवासीय योजना लॉन्च करने जा रहा है, जिसमें 973 प्लॉट्स की पेशकश की जाएगी.
अधिकारियों के अनुसार, 17.5% प्लॉट्स उन किसानों के लिए आरक्षित होंगे जिनकी भूमि यमुना क्षेत्र और NIA के विकास के लिए अधिग्रहित की गई है. इसके अलावा, 5% प्लॉट्स उन व्यापारियों के लिए आरक्षित होंगे जिनकी औद्योगिक इकाइयां प्राधिकरण क्षेत्र में संचालित हैं. प्लॉट्स की दर 36,260 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई है और सेक्टर 15-C, 18 और 24 में स्थित इन प्लॉट्स का आवंटन ड्रा (लॉटरी) के माध्यम से किया जाएगा.
धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जनपद के बर्थराकला गांव में किसान तक का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रही इस विशेष कवरेज में यह 56वां पड़ाव रहा, जहां किसानों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया.
पुणे में पिछले तीन से चार दिनों से हो रही बेमौसम बारिश और तेज ओलावृष्टि ने किसानों को बड़ा झटका दिया है. खासकर जैविक खेती के जरिए तरबूज उत्पादन करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. जहां पहले लगभग 100 टन उत्पादन की उम्मीद थी, वहीं अब केवल 6 से 7 टन उत्पादन मिलने की संभावना जताई जा रही है. सोने जैसी तैयार फसल अब मिट्टी के भाव हो गई है, जिससे किसानों में नाराजगी का माहौल है.
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज वेयरहाउस में 22 हजार टन गेहूं सड़कर बर्बाद हो गया. इस गेहूं की कीमत करीब 35 करोड़ रुपये थी, लेकिन इसे बचाने में किराया, रखरखाव और कीटनाशक छिड़काव पर खर्च लगभग 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. साल 2022 में सीहोर जिले से यह गेहूं रायसेन भेजा गया था, लेकिन लंबे समय तक खराब अवस्था में पड़ा रहने के कारण यह पशुओं के चारे के योग्य भी नहीं बचा. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खराब अनाज स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और नष्ट करने या नीलाम करने का निर्णय लिया जाएगा.
बिहार लगातार कई सामाजिक, आर्थिक और मानव विकास सूचकांकों में देश के अन्य राज्यों से बहुत पीछे है. यहाँ देश में सबसे कम साक्षरता दर, सबसे कम प्रति व्यक्ति आय, सबसे कम किसानों की आय, सबसे कम निवेश और उपभोग दर दर्ज की जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रति व्यक्ति आय, बिजली खपत और औद्योगिक विकास सबसे कम है. इसके साथ ही बिहार में अपराध, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और पलायन की दर देश में सबसे अधिक है. शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार पिछड़ा हुआ है. देश में सबसे कम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रति लाख आबादी सबसे कम कॉलेज और कृषि ऋण में न्यूनतम सहायता बिहार को कमजोर बनाती है. स्वास्थ्य और पोषण के संकेतकों में भी राज्य सबसे नीचे है. यहाँ “कम वजन वाले बच्चे”, बौने बच्चे, खून की कमी से पीड़ित महिलाएं और डॉक्टरों की रिक्त पदों की संख्या सबसे अधिक है. झोपड़ी में रहने वाले लोगों की संख्या भी उच्चतम है. औद्योगिक विकास, निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं में राज्य लगातार पिछड़ा हुआ है. पिछले दशकों में एनडीए और डबल इंजन सरकारों के शासनकाल के बावजूद बिहार के अधिकांश सामाजिक, आर्थिक और मानव विकास सूचकांक राष्ट्रीय औसत से बहुत कम हैं. राज्य सरकार लगातार विपक्ष पर दोषारोपण कर अपनी असफलता छुपाने का प्रयास करती है, लेकिन वास्तविकता यही है कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आय और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में बिहार को राष्ट्रीय औसत तक पहुँचाने के लिए ठोस नीति और गंभीर प्रयास की आवश्यकता है. यदि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री में इच्छाशक्ति और योग्यता है, तो इस पर सार्वजनिक बहस करके समाधान खोजा जा सकता है.
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जनसुनवाई के बाद कलेक्टर साकेत मालवीय से मंच पर ही नाराज नजर आए. जनपद पंचायत में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम के समापन के बाद जैसे ही कलेक्टर आवेदनों को थैले में रखने के लिए इकट्ठा कर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि आवेदन पूरी तरह अव्यवस्थित थे. इस पर मंत्री सिंधिया ने कलेक्टर को डाँटते हुए कहा कि ये आवेदन कोई सामान नहीं बल्कि जनता की उम्मीद और विश्वास हैं. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आवेदन व्यवस्थित तरीके से फाइलिंग कर थैले में रखें. मंत्री ने जोर देकर कहा कि जिस गंभीरता से जनता अपने काम के लिए आवेदन करती है, प्रशासन को भी उसी गंभीरता से उनका निपटारा करना चाहिए. इस चेतावनी के बाद कलेक्टर साकेत मालवीय ने तुरंत सभी आवेदनों को व्यवस्थित कर थैले में रखा और मंत्री की नाराजगी को दूर किया. इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रशासन और अधिकारियों को जनता के कार्यों में गंभीरता और ईमानदारी के साथ योगदान देना चाहिए.
पंजाब के गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की खड़ी फसल को हुए भारी नुकसान को लेकर केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि हाल ही में हुई तेज बारिश और ओलों ने पंजाब के किसानों की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है. सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस नुकसान का तुरंत आकलन कराया जाए और प्रभावित किसानों को राहत प्रदान की जाए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पंजाब में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू न होने की स्थिति में किसानों को किस प्रकार राहत दी जाएगी और इसके लिए स्पष्ट तंत्र तैयार किया जाना चाहिए. रंधावा ने आग्रह किया है कि केंद्र सरकार इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जल्द हस्तक्षेप करे, ताकि किसानों को समय पर सहायता मिल सके और वे इस संकट से उबर सकें.
पंजाब के मोगा जिले में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. धर्मकोट क्षेत्र के कंडियाल समेत कई गांवों में तेज हवाओं और ओलों के कारण करीब 1100 एकड़ पकी हुई गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई. कटाई के ठीक पहले आई इस आपदा ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया और उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया. किसानों का कहना है कि उन्होंने जमीन ठेके पर लेकर कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने सब कुछ खत्म कर दिया. पाला सिंह, पुरण सिंह, हरदीप सिंह और अन्य किसानों ने बताया कि गेहूं के साथ-साथ सब्जियों की फसल भी पूरी तरह नष्ट हो गई है. अब उनके पास न फसल बची है और न ही कर्ज चुकाने का कोई साधन. किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें और अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें. यह घटना एक बार फिर किसानों की बढ़ती मुश्किलों और मौसम की अनिश्चितता को उजागर करती है.
India Meteorological Department के अनुसार 6 अप्रैल को राजस्थान, बिहार और झारखंड में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. दो पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर-पश्चिम भारत में 7-8 अप्रैल को मौसम चरम पर रहेगा. कश्मीर घाटी में 7 अप्रैल को कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना है. देश के अधिकांश हिस्सों में 9 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश होगी, जबकि तापमान सामान्य या उससे कम रहने की उम्मीद है.