उत्तर भारत में सर्दियों की दस्तक के साथ मौसम पूरी तरह बदल चुका है और ठंड का असर साफ नजर आने लगा है. पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बढ़ती शीतलहर के बीच जनजीवन और खेती-किसानी की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है. वहीं दक्षिण भारत में लगातार बारिश का दौर बना हुआ है. इस लाइव और लगातार अपडेट होते सेक्शन में आपको खाद-बीज से जुड़ी जानकारी, खेती और गार्डनिंग के उपयोगी टिप्स, किसानों के लिए जरूरी सरकारी योजनाएं और कृषि जगत से जुड़े बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रम एक ही जगह मिलते रहेंगे.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चमोली में CM धामी के साथ किसानों के सम्मेलन में हिस्सा लिया. शिवराज सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक क्लीन प्लांट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा. शिवराज सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में कृषि रोडमैप और किसानों की ज़रूरतों पर विचार करने के लिए वैज्ञानिकों और अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है. शिवराज सिंह ने कहा कि छोटे किसानों के फायदे के लिए उत्तराखंड में एक इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल विकसित किया जाएगा. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि न्यूजीलैंड के सहयोग से उत्तराखंड में कीवी की खेती के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा. शिवराज सिंह ने कहा कि विकसित भारत - जी राम जी योजना गांवों के विकास के लिए जीवनरेखा है.
रायसेन-किसानों ने सागर भोपाल मार्ग पर किया चक्काजाम
धान के आज सही दाम नहीं मिलने से किया चक्काजाम
आज धान के दाम अचानक 1000 हज़ार रुपए हुए कम
आज धान के दाम कम होने के कारण किसानो ने किया विरोध और कर रहे है चक्काजाम
कल धान के दाम 4000 हज़ार रुपए कुंटल थी और आज 3000 होने से किसानो का फूटा गुस्सा
स्थानीय प्रसाशन मोके पर मौजूद किसानों से बातचीत जारी
किसान अपनी मागों को लेकर अड़े प्रसाशन परेशान
सड़क के तीनो तरफ़ वाहनों की लगी लंबी लंबी कतारें
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में बांस काटने का काम कर रहे दो मजदूरों की अलग-अलग बाघों के हमले में मौत हो गई. घटनाएं शनिवार शाम को ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व (TATR) के बफर जोन में हुईं. मध्य प्रदेश के मंडला जिले के शैसावी गांव के रहने वाले बुधसिंह श्यामलाल मडावी (41) की चंद्रपुर फॉरेस्ट रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 381 में बाघ के हमले में मौत हो गई.मध्य प्रदेश के ही सरी इलाके के प्रेमसिंह उडे (55) की कंपार्टमेंट नंबर 357 में मौत हो गई. दोनों मृतकों के परिजनों को शुरुआती मुआवजा दे दिया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से और बाघों की सक्रियता को देखते हुए पुलिस और वन विभाग ने बफर जोन में बांस काटने के काम को अस्थायी रूप से रोक दिया है. क्षेत्र के अन्य मजदूरों और आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.
किसान तक का किसान कारवां आज से शुरू हो चुका है. 29 दिसंबर को पहले दिन, इस कारवां का पहला पड़ाव अमरोहा के गजरौला में पहुंचा है. यहां सैकड़ों की संख्या में किसान जुटे हैं. किसान कारवां पहले दिन अमरोहा के गजरौला के जलालपुर गांव में पहुंचा. इस दौरान गांव के किसानों के साथ यहां की ग्राम प्रधान बंटी यादव के साथ महेश्वरा ग्रामप्रधान श्योमनाथ सिंह, मीरापुर ग्रामपंचायत से सतेन्द्र सिंह, धनौरीमाफ़ी ग्रामपंचायत से हरविन्दर सिंह और देहरा धनश्याम ग्रामपंचायत से सुरेन्द्र सिंह यादव मौजूद रहे. इतना ही नहीं किसान कारवा में विशेषज्ञों की भागीदारी भी रही. इस अवसर पर खेती-किसानी से जुड़े कई विशेषज्ञ भी मौजूद रहे. केवीके अमरोहा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एके सिंह, कृषि प्रोफेसर डॉ. ज्योति सिंह मौजूद रहे. इस कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए. मंच पर प्रगतिशील किसानों ने अपनी सफलता की कहानियाँ और अनुभव सैंकड़ों किसानों के साथ बांटे. पहले दिन चन्द्रपाल सिंह, चन्द्रभान सिंह, नरेश, राजेन्द्र और राजीव कुमार समेत कई प्रगतिशील किसानों ने यहां मंच साझा किया.किसान तक के किसान कारवां में किसानों को अपनी बात और समस्याएं रखने के लिए एक साझा मंच मिला है और यहां उनकी सराहना भी की जा रही है. बता दें कि यह उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप (किसान तक) की एक साझा पहल है. यह कारवां उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जाएगा. 29 दिसंबर से शुरू होकर यह अभियान मई तक चलेगा.
29 दिसंबर से किसानों की आवाज, उनके अनुभव और जरूरतों को केंद्र में ‘किसान तक – किसान कारवां’ का आगाज हुआ है. ये पहल उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से शुरू की गई है और इसका मकसद सरकार और किसानों के बीच एक मजबूत, भरोसेमंद और लगातार चलने वाला संवाद स्थापित करना है. ऐसा संवाद, जिसमें किसान केवल श्रोता नहीं, बल्कि भागीदार बन सकें. खास बात ये कि यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. पहले दिन किसान तक का किसान कारवां अमरोहा के गजरौला के जलालपुर गांव में पहुंचा. इस दौरान गांव के किसानों के साथ यहां की प्रधान बंटी यादव भी मौजूद रहीं.
किसानों की आवाज, उनके अनुभव और जरूरतों को केंद्र में रखकर शुरू होने जा रहा है ‘किसान तक – किसान कारवां’. ये पहल उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से शुरू की जा रही है, जिसका उद्देश्य सरकार और किसानों के बीच एक मजबूत, भरोसेमंद और लगातार चलने वाला संवाद स्थापित करना है. 29 दिसंबर को शुरू हुए कार्यक्रम के पहले दिन यह किसान कारवां अमरोहा पहुंचा, जहां पर किसानों ने अपने अलग-अलग तरह के अनुभव साझा किए. अमरोह के गजरौला में आने वाले जलालपुर गांव में सोमवार को किसान कारवां ने कई किसानों को उनकी बातों को साझा करने का मंच प्रदान किया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में होने वाले 'खिचड़ी मेले' की तैयारियों का रिव्यू किया और कहा कि भक्तों की सुरक्षा और आराम सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. तैयारियां समय पर पूरी होने पर खुशी जताते हुए, उन्होंने प्रशासन और सभी संबंधित विभागों से अपनी-अपनी जिम्मेदारियों से जुड़े इंतज़ामों का लगातार रिव्यू करने और उन्हें ठीक करने को कहा. खिचड़ी मेला मकर संक्रांति से शुरू होता है और एक महीने से ज्यादा समय तक चलता है. मकर संक्रांति 14 जनवरी, 2026 को मनाया जाएगा. गोरखनाथ मंदिर में सीनियर अधिकारियों के साथ देर शाम हुई मीटिंग के दौरान, CM को मेले के लिए किए जा रहे इंतजा के बारे में जानकारी दी गई. आदित्यनाथ ने कहा कि खिचड़ी मेला न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के भक्तों के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह देश और विदेश से भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है. उन्होंने कहा कि इसके बड़े आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए, भक्तों को वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं दी जानी चाहिए. CM ने कहा कि यह मेला गोरखपुर के विकास को दिखाने का एक अहम मौका भी देता है और अधिकारियों से यह पक्का करने को कहा कि आने वाले लोग शहर की एक अच्छी छाप लेकर लौटें.
हिमाचल प्रदेश में नए साल का आगाज बदले हुए मौसम के साथ होने की संभावना है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 30 दिसंबर से राज्य में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से उच्च एवं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश व बर्फबारी होने की संभावना है. वहीं, 31 दिसंबर और 1 जनवरी को मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश के आसार जताए गए हैं. मौसम विभाग के अनुसार आगामी दो दिन यानी 28 और 29 दिसंबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन मैदानी व निचले पर्वतीय क्षेत्रों में देर रात और सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है. इसके लिए सात जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है. ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिलों के कई इलाकों में कोहरे के कारण दृश्यता 50 मीटर से भी कम रहने की संभावना है. बिलासपुर के लिए तो घने से बहुत घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.
अकोला में स्वतंत्र भारत के पहले कृषि मंत्री स्वर्गीय डॉ. पंजाबराव देशमुख की 127वीं जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य राज्यस्तरीय कृषि प्रदर्शनी ‘एग्रोटेक 2025’ किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और परंपरा का संगम बनकर सामने आई है. डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के क्रीडांगण में 27 से 29 दिसंबर तक चलने वाली इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी ने किसानों, युवाओं और आम नागरिकों को बड़ी संख्या में आकर्षित किया है.
राजस्थान के धौलपुर में घना कोहरा छाया हुआ है जिससे सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो गई है और आवाजाही धीमी हो गई है. जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, लोग कड़ाके की सर्दी में खुद को गर्म रखने के लिए अलाव के चारों ओर दुबके हुए दिख रहे हैं.
रविवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित 2,866 एकड़ आरक्षित फॉरेस्ट लैंड की लीज से जुड़ी जांच समिति की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसमें पुलिस और वन विभाग की टीमों पर पथराव किया गया. प्रदर्शनकारियों ने कई घंटों तक राजमार्ग और रेलवे ट्रैक को भी ब्लॉक कर दिया. हालांकि, जानकारी मिलने पर देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर रेलवे लाइन और हाइवे पर यातायात बहाल करने को कहा. रिजर्व फॉरेस्ट लैंड की लीज के मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 22 दिसंबर को ऑर्डर पास किया गया था. इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने एक जांच समिति का गठन किया था, जो फॉरेस्ट लैंड का सर्वे कर रही है. इसी प्रॉसेस के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. शाम 4 बजे मनसा देवी क्षेत्र में लोगों ने रेलवे ट्रैक पर धरना दिया, जिससे ऋषिकेश जाने वाली बाड़मेर एक्सप्रेस चार घंटे तक रुकी रही.
उत्तर प्रदेश के बदायूं के पिपरौली गांव के लगभग 200 निवासियों ने एहतियात के तौर पर रेबीज का टीका लगवाया, जब उन्हें पता चला कि अंतिम संस्कार में खाया गया रायता (दही से बना व्यंजन) उस भैंस के दूध से बना था जिसकी कुत्ते के काटने से मौत हो गई थी. ग्रामीणों के अनुसार, 23 दिसंबर को गांव में एक अंतिम संस्कार हुआ था, जहां उन्होंने रायता खाया था.बाद में पता चला कि जिस भैंस के दूध से रायता बनाया गया था, उसे कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था. भैंस की 26 दिसंबर को मौत हो गई, जिसके बाद संक्रमण के डर से गांव में दहशत फैल गई. ग्रामीण उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और टीका लगवाया. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने रविवार को बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि गांव में एक भैंस को रेबीज से संक्रमित कुत्ते ने काट लिया था और रेबीज के लक्षणों के कारण उसकी मौत हो गई थी. यह बताया गया कि ग्रामीणों ने 'संक्रमित' रायता खा लिया था. एहतियात के तौर पर सभी को रेबीज का टीका लगवाने की सलाह दी गई. मिश्रा ने कहा, 'इलाज से बेहतर बचाव है. जिन लोगों को भी कोई शंका थी, उन्हें एंटी-रेबीज टीका लगाया गया. आमतौर पर दूध उबालने के बाद रेबीज का कोई खतरा नहीं होता, लेकिन किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए टीकाकरण किया गया.'
उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े ऐलान किए है. सीएम ने प्रदेश के सभी बोर्डों (ICSE, CBSE और यूपी बोर्ड) के कक्षा 12वीं तक के स्कूलों को 1 जनवरी तक बंद करने का आदेश दिया है. मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि शीतलहर के दौरान बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले. इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके अलावा सीएम ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में जाएं और जमीनी हकीकत का जायजा लें. सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री ने रैन बसेरों के संचालन को लेकर अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है. उन्होंने कहा है कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो. सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं. अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो.