उत्तर भारत में सर्दियों की दस्तक के साथ मौसम पूरी तरह बदल चुका है और ठंड का असर साफ नजर आने लगा है. पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश और शीतलहर के बीच जनजीवन और खेती-किसानी की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है. इस लाइव और लगातार अपडेट होते सेक्शन में आपको खाद-बीज से जुड़ी जानकारी, खेती और गार्डनिंग के उपयोगी टिप्स, किसानों के लिए जरूरी सरकारी योजनाएं और कृषि जगत से जुड़े बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रम एक ही जगह मिलते रहेंगे. साथ ही बात करेंगे उन्नत क़िस्मों की बीजों के बारे में जिसका लाभ उठाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
राजस्थान के अधिकतर किसान मिलेट, मक्का, मूंगफली और दालों की खेती करते हैं. इसके साथ ही पशुओं से भी उनकी आमदनी जुड़ी होती है. लेकिन कुछ किसान नई तकनीक और विज्ञान से जुड़े काम में भी हाथ आजमा रहे हैं. ऐसा ही एक उदाहरण है शंकर मीणा का. उन्होंने बचपन अपने पिता के मक्का के खेतों में खेलकर बिताया. धीरे-धीरे उन्होंने देखा कि उनके पिता कितनी मेहनत करते हैं, लेकिन आमदनी बहुत कम है. शंकर ने सोचा कि पुरानी फसलें अब पर्याप्त आमदनी नहीं दे रही हैं, इसलिए कुछ नया करना होगा. उन्होंने रिसर्च की और मशरूम की खेती के बारे में जाना.
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गुजरात के मेहसाणा जिले में किसान और व्यापारी सरकार के नीति के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं. दरअसल, उत्तर गुजरात के कृषि और व्यापार का हब माने जाने वाले मेहसाणा के उनावा में फिलहाल तंबाकू की खेती करने वाले किसान और व्यापारी सरकार की नीति के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं. सरकार द्वारा गैर-विनिर्मित तंबाकू पर जिस तरह से टैक्स का बोझ बढ़ाने की तैयारी की गई है, उसके कारण व्यापारी और किसान दोनों मुश्किल में आ गए हैं. ऊंझा तंबाकू व्यापारी मंडल और किसानों ने मिलकर उनावा APMC चेयरमैन को ज्ञापन सौंपकर इस टैक्स को घटाने की मांग की है.
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उत्तर प्रदेश दिवस 24 जनवरी 2026 के अवसर पर गाजियाबाद में जिला प्रशासन द्वारा गाजियाबाद गौरव सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षित और सरकारी कृषि योजनाओं के प्रचार में योगदान देने वाले पांच किसानों-अवनीश त्यागी, मंजू कश्यप, नीतू चौधरी, सुनील चौहान और जयवीर यादव-को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप, विधायक मंजू सिवाच सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे. इस दौरान कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रदर्शित तकनीकों की सराहना की गई. कृषि विज्ञान केंद्र ने इस पहल को किसानों को नई तकनीक अपनाने की प्रेरणा देने वाला बताया.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 130वें एपिसोड के मन की बात में कहा, "आंध्र प्रदेश का अनंतपुर ऐसा क्षेत्र है जो गंभीर सूखे की समस्या से जूझ रहा है. यहां की मिट्टी लाल और रेत जैसी है, इसलिए लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है. कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती. इस समस्या को हल करने के लिए स्थानीय लोगों ने जलाशयों की सफाई करने का निर्णय लिया. प्रशासन के सहयोग से 'अनंता नेरु संरक्षणम प्रोजेक्ट' शुरू किया गया. दस से ज्यादा जलाशयों को फिर से जीवित किया गया. साथ ही 7,000 से अधिक पेड़ लगाए गए.
मन की बात के 130वें एपिसोड में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "गुजरात के बेहराजी के चंदनकी गांव की परंपरा अनोखी है. यहां के लोग, खासकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते हैं. इसका कारण गांव की शानदार कम्युनिटी किचन है. इस कम्युनिटी किचन में पूरे गांव के लिए खाना बनता है, और लोग साथ बैठकर खाते हैं. यह परंपरा पिछले 15 सालों से चली आ रही है. यह पहल न सिर्फ लोगों को जोड़ती है, बल्कि परिवार जैसी भावना भी पैदा करती है.
राजस्थान के कई शहरों में हुई मावठ की बारिश के बाद एक बार फिर सर्दी अपने 'टॉर्चर' पर आ गई है. सर्द हवाओं ने दो दिन से उदयपुर शहर को जकड़ रखा है. वहीं, जिले के गोगुंदा कस्बे में तो तापमान जमाव बिंदु से नीचे माइनस में -5 डिग्री तक पहुंच गया है. इधर, मौसम विज्ञानियों के अनुसार जिले में मावठ के आसार बन रहे है. ऐसे में सर्दी से इस सप्ताह राहत नहीं मिलेगी. दिन और रात के तापमान में एक ही दिन में 6-6 डिग्री की कमी के साथ कुल 12 डिग्री की गिरावट हुई है. उदयपुर शहर में पड़ रही सर्दी के चलते जिले में स्थित गोगुन्दा कस्बा इन दिनों सबसे ठंडा क्षेत्र है. कस्बे सहित आसपास गांव के खेतों और घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों पर बर्फ जम गई. ग्रामीण कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे है. खेतों में खड़ी फसलों पर पाला गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, साथ ही हाड़ कंपाने वाली ठंड से जन जीवन भी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है.
केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज सुबह 11 बजे दिल्ली के पूसा परिसर में देशभर से आई लखपति दीदियों से संवाद करेंगे. इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान लखपति दीदियों से उनके अनुभव और उपलब्धियों के बारे में सुनेंगे और उनसे सीधे बातचीत करेंगे. हर साल गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में लखपति दीदियाँ नई दिल्ली आती हैं और इस तरह के संवाद उन्हें अपने अनुभव साझा करने और सीखने का अवसर प्रदान करते हैं.
भारत में खेती सिर्फ अनाज उगाने का काम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी है. आज भी देश की लगभग आधी आबादी खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है. साल 2023-24 में खेती ने भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 18 प्रतिशत का योगदान दिया. धीरे-धीरे खेती अब सब्ज़ी, फल, दूध, मछली पालन और खेती से जुड़ी फैक्ट्रियों तक फैल रही है. इससे किसानों को ज्यादा कमाई का मौका मिल रहा है. अब जब बजट 2026 आने वाला है, तो यह ज़रूरी है कि खेती को और मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाए.
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जम्मू और कश्मीर की घाटी में भारी बर्फबारी हुई. बर्फबारी के बाद हर तरफ बर्फ की मोटी चादर बिछ गई.
उत्तर भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में गणतंत्र दिवस के दिन मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार 26 से 28 जनवरी के बीच सक्रिय हो रहा ताजा पश्चिमी विक्षोभ कई राज्यों में बारिश, बर्फबारी, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की वजह बन सकता है. 27 जनवरी को जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अलग अलग स्थानों पर भारी बारिश और बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. पहाड़ों के साथ साथ मैदानी इलाकों में भी आंधी, बिजली और तेज झोंकों के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. बीते 24 घंटों में भी जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी वर्षा और बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे ठंड और बढ़ गई है.
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पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों के मौसम पर भी साफ नजर आने लगा है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार बर्फ गिरने से ठंड ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. जिन मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर कमजोर पड़ती दिख रही थी, वहां अब तापमान फिर से नीचे जाने लगा है. देश की राजधानी दिल्ली में हुई बारिश से भले ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में हल्का सुधार दर्ज किया गया हो, लेकिन बदलते मौसम ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गंभीर चेतावनी जारी कर दी है. मौसम विभाग के मुताबिक 27 और 28 जनवरी को मौसम बेहद उग्र हो सकता है. IMD ने बताया है कि इस बिगड़ते मौसम के पीछे एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जिम्मेदार है, जिसने पूरे उत्तर भारत को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. पहाड़ों पर भारी बर्फबारी, मैदानी इलाकों में बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका ने हालात और चिंताजनक बना दिए हैं. कई राज्यों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे ठंड दोबारा जानलेवा साबित हो सकती है. मौसम विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.