मधुमक्खियां और परागन करने वाले कीटों की संख्या में कमी आ रही है जिसके चलते पौधों का पॉलिनेशन नहीं हो पा रहा है. ऐसे में उत्पादन में भी गिरावट देखने को मिल रही है. पॉलिनेशन दो तरह से होता है एक तो प्राकृतिक तरीका वहीं दूसरा कृत्रिम. कद्दू वर्गीय सब्जियों में हम हाथ से भी पॉलिनेशन कर सकते हैं. इससे उत्पादन ही नहीं बढ़ता है बल्कि सब्जियां भी स्वस्थ पैदा होती हैं. आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर आस्तिक झा ने पॉलीनेशन से जुड़ी तमाम जानकारी दी. देखें वीडियो.