
मध्यप्रदेश में खरीफ सीजन 2026 को लेकर कृषि विभाग ने तैयारी तेज कर दी है. इसी कड़ी में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने रविवार को किसानों के लिए समसामयिक सलाह और विभागीय तैयारियों की जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि हमारा फोकस समय पर बोवनी, संतुलित इनपुट उपयोग और कम लागत वाली खेती पर है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन को देखते हुए 28 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज और 45 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है. वहीं, बाजार में कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था सक्रिय की गई है और कंट्रोल रूम भी चालू किए गए हैं.
कृषि मंत्री ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई के तहत 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा 25 हजार नए खेत तालाब मंजूर किए गए हैं. ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ के जरिए किसानों को कृषि मशीनों पर सब्सिडी दी जा रही है और कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या बढ़ाकर 2500 की गई है.
वहीं, उन्होंने किसानों को बोवनी से पहले मिट्टी परीक्षण कराने की सलाह दी है, ताकि फसल के अनुसार उर्वरक का सही इस्तेमाल हो सके. इसके साथ ही सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्का की बुवाई से पहले बीज उपचार को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और फसलों में रोगों का खतरा भी कम होगा.
कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने किसानों से अपील की है कि वे पर्याप्त बारिश (करीब 4 इंच) के बाद ही बोवनी करें. साथ ही किसानों को ‘एमपी किसान ऐप’ के जरिए मौसम पूर्वानुमान देखकर निर्णय लेने को कहा है, ताकि नुकसान का खतरा कम किया जा सके.
कृषि मंत्री ने खरीफ सीजन में कम पानी वाली फसलों जैसे कोदो, कुटकी और रागी को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इन फसलों की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर करेगी. वहीं, रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घन-जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट जैसे विकल्प अपनाकर प्राकृतिक और जैविक खेती की सलाह दी, ताकि लागत घटे और मिट्टी की गुणवत्ता भी अच्छी रहे.
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य स्तर पर संचालित योजनाओं के तहत किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि फसल बीमा के अंतर्गत नुकसान के आकलन के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही एफपीओ के जरिए किसानों को प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और निर्यात से जोड़ने की प्रक्रिया भी जारी है, ताकि उपज को बेहतर बाजार मिल सके.