ताज नगरी आगरा में आलू किसानों को मिली नई जानकारी, Kisan Karwan में पहुंचे सैकड़ों अन्नदाता

ताज नगरी आगरा में आलू किसानों को मिली नई जानकारी, Kisan Karwan में पहुंचे सैकड़ों अन्नदाता

किसान कारवां अपने आठवें पड़ाव के दौरान मुड़ी जहांगीरपुर गांव पहुंचा. जहां किसानों को सरकार की नई योजनाओं और खेतों में उर्वरकों के सही उपयोग की पूरी जानकारी दी गई. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुरुष और महिला किसान मौजूद रहे.

किसान कारवांकिसान कारवां
धर्मेंद्र सिंह
  • Noida,
  • Jan 12, 2026,
  • Updated Jan 12, 2026, 5:22 PM IST

किसान तक का किसान कारवां आज ताज नगरी आगरा के खंडोली ब्लॉक के मुड़ी जहांगीरपुर गांव में पहुंचा. यह उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे किसान कारवां का आठवां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुरुष और महिला किसान मौजूद रहे. किसान कारवां के दौरान किसानों को कृषि वैज्ञानिकों, इफको और मुथूट फाइनेंस के प्रतिनिधियों की ओर से अलग-अलग सरकारी योजनाओं और आधुनिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं. किसानों ने इस कार्यक्रम में न केवल योजनाओं की जानकारी ली, बल्कि अपने अनुभव भी साझा किए और कृषि अधिकारियों से सीधे सवाल पूछे.

एक्सपर्ट ने बताए सेक्स सॉर्टेड सीमेन के फायदे

पहले चरण में आगरा पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ. ओम बाबू ने पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अच्छी नस्ल के पशुओं के पालन से पशुपालकों और किसानों की आमदनी कैसे बढ़ाई जा सकती है. साथ ही उन्होंने सेक्स सॉर्टेड सीमेन के फायदे बताए और किसानों से भारत पशुधन ऐप से जुड़ने की अपील की. इसके अलावा नंद बाबा पशुधन योजना की जानकारी भी साझा की.

डीएपी की पुरानी पद्धतियों को छोड़ने की अपील

दूसरे चरण में इफको के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक चौधरी ने किसानों से यूरिया और डीएपी की पुरानी पद्धतियों को छोड़ने की अपील की. उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी का उपयोग कैसे किया जाए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि इन उत्पादों से न केवल फसल लागत कम होती है, बल्कि उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

किसानों को मिला झुलसा रोग से बचाव का उपाय

तीसरे चरण में आगरा, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. आर.एस. चौहान ने आलू में लगने वाली झुलसा बीमारी को लेकर किसानों को सतर्क किया. उन्होंने बताया कि बुवाई से पहले उपचार कितना जरूरी है और पुरानी पद्धतियों से होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी दी. साथ ही बोरिक एसिड और ट्राइकोडर्मा से उपचार के लाभ बताएं. उन्होंने कहा कि झुलसा रोग पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है.

पशुओं को संतुलित पशु आहार देने पर जोर

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक धर्मेंद्र सिंह ने अधिक दूध उत्पादन के लिए संतुलित पशु आहार पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि किसान केवल हरे चारे पर निर्भर न रहें, बल्कि पशु आहार में मिनरल मिश्रण की मात्रा पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि मिनरल की कमी से दूध उत्पादन प्रभावित होता है.

'किसान ड्रोन की मदद से करें डीएपी का छिड़काव'

पांचवें चरण में इफको के सीनियर मैनेजर डॉ. प्रहलाद सिंह ने कहा कि आज भी किसान खेती में पुरानी तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी का उपयोग आलू जैसी फसलों में ड्रोन के माध्यम से करने पर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.

किसानों को साहूकारों से बचने की सलाह

छठे चरण में मुथूट फाइनेंस लिमिटेड, टूंडला शाखा के ब्रांच मैनेजर राजेश मिश्रा ने किसानों को साहूकारों और सूदखोरों से बचने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि किसान अपने घर में रखे सोने के जेवर गिरवी रखकर कम ब्याज दर पर गोल्ड लोन ले सकते हैं. साथ ही मुथूट फाइनेंस के रिलेशनशिप मैनेजर निशांत उपाध्याय ने बताया कि जरूरत के समय किसान जेवर के बदले आसानी से लोन लेकर अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी कर सकते हैं.

जादूगर सलमान ने दिखाया अपना जादू

सातवें चरण में जादूगर सलमान ने अपने जादुई अंदाज में किसान तक के किसान कारवां के संदेशों को किसानों तक पहुंचाया. उन्होंने मनोरंजक अंदाज में किसानों को नैनो यूरिया के फायदे बताए. साथ ही उन्होंने मुथूट फाइनेंस के माध्यम से किसानों को खेती के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई.

किसानों को मिली PM कुसुम योजना की जानकारी

आठवें चरण में वरिष्ठ कृषि सहायक, विष्णु त्यागी ने किसानों को सरकार के द्वारा चलाई जा रही पीएम कुसुम योजना के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि इस योजना से न सिर्फ किसानों की फसल लागत कम हो रही है, बल्कि बिजली के ऊपर उनकी निर्भरता भी घट रही है. इसके साथ ही किसानों को उन्होंने बहुत उपयोगी जानकारी दी.

लकी ड्रा के तहत किसानों को मिले पुरस्कार

नौवें चरण में कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का सम्मान किया गया और लकी ड्रा के तहत विजेताओं की घोषणा की गई. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रा के माध्यम से 12 किसानों का चयन किया गया, जिसमें प्रथम पुरस्कार के रूप में गोविंद सिंह को 3000, द्वितीय पुरस्कार के रूप में राजा भैया को 2000 रुपये मिले. इसके अलावा 10 किसानों को 500-500 रुपये की पुरस्कार राशि दी गई. कार्यक्रम के अंत में आगरा जिले के किसान नई जानकारियों और मुस्कान के साथ अपने घरों की ओर रवाना हुए.

किसान कारवां पहल का मकसद

किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.

हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.

2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.

3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.

4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.

5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.

6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.

7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.

8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर

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