भारत बनेगा दुनिया का ‘फूड बास्केट’, फर्जी कृषि डिग्रियों पर लगेगी रोक, जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल: शिवराज

भारत बनेगा दुनिया का ‘फूड बास्केट’, फर्जी कृषि डिग्रियों पर लगेगी रोक, जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल: शिवराज

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनेगा. उन्होंने फर्जी कृषि डिग्रियों और बिना मानक वाले निजी कृषि कॉलेजों पर सख्ती की बात करते हुए जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल गठित करने की घोषणा की. साथ ही छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग, आधुनिक तकनीक और विविधीकृत खेती पर जोर दिया.

क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 14, 2026,
  • Updated Oct 14, 2026, 4:40 PM IST

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत अब केवल अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में दुनिया के लिए "फूड बास्केट" के रूप में उभरेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि शिक्षा की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और बिना मानकों के संचालित होने वाले निजी कृषि महाविद्यालयों और फर्जी डिग्रियों के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके लिए सरकार जल्द ही एक एग्रीकल्चर काउंसिल के गठन की दिशा में कदम उठाएगी.

देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर

एक राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए चौहान ने देश की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय भारत को पीएल-480 योजना के तहत विदेशों से अनाज आयात करना पड़ता था, लेकिन आज देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है. उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और सरकार की कृषि नीतियों के संयुक्त प्रयास से कृषि क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन लगभग 49 प्रतिशत बढ़ा है. भारत आज चावल उत्पादन और निर्यात में दुनिया में अग्रणी है, जबकि गेहूं उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है. उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि उत्पादों के बेहतर भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और वैश्विक बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने की है. इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और कृषि निर्यात को भी नई गति मिलेगी.

नीति निर्माण में किसान और छात्र संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन जमीनी स्तर पर काम करते हैं और उनकी समझ नीति निर्माण में बेहद उपयोगी है. उन्होंने अधिवेशन में शामिल छात्रों, कृषि विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से व्यापक मंथन कर ठोस सुझाव देने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा, “आप मंथन करके अमृत निकालिए, उसे नीति के रूप में लागू करने का काम सरकार करेगी.” साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अधिवेशन में सामने आने वाले सुझावों और निष्कर्षों पर अमल के लिए अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक आयोजित की जाएगी. इस दौरान अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर चर्चा कर उन्हें क्रियान्वित करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा.

फीस वसूलकर डिग्रियां बांटने में लगे कुछ संस्थान

कृषि शिक्षा के मुद्दे पर चौहान ने कहा कि देश में कुछ संस्थान केवल फीस वसूलकर डिग्रियां बांटने का काम कर रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बीएससी (एजी), एमएससी (एजी) और अन्य कृषि तकनीकी डिग्रियों की क्वालिटी और मान्यता बरकरार रहे. उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत और समय किसी भी स्थिति में व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा.

छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को सबसे प्रभावी बताया. उन्होंने कहा कि भारत में औसत जोत का आकार केवल 0.96 हेक्टेयर है, इसलिए केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहकर किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है. किसानों को फसल उत्पादन के साथ फल, सब्जी, औषधीय पौधों की खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती जैसे विकल्पों को अपनाना होगा.

इसके साथ ही उन्होंने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य की खेती तकनीक आधारित होगी और सरकार किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि छात्रों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से भारत न केवल खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक कृषि व्यापार में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा.

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