चीनी उद्योग में बदलाव की तैयारी, सरकार का बड़ा फैसला- अब हर जगह नहीं खुल पाएगी चीनी मिल

चीनी उद्योग में बदलाव की तैयारी, सरकार का बड़ा फैसला- अब हर जगह नहीं खुल पाएगी चीनी मिल

सरकार ने नई चीनी मिलों के लिए न्यूनतम दूरी 15 किमी से बढ़ाकर 25 किमी करने का प्रस्ताव रखा है. इसका उद्देश्य गन्ने की उपलब्धता संतुलित रखना और उद्योग को व्यवस्थित करना है. घटती चीनी खपत और बढ़ती गुड़ मांग के बीच यह फैसला किसानों और मिलों दोनों को प्रभावित कर सकता है.

चीनी मिलों की दूरी बढ़ाने की तैयारीचीनी मिलों की दूरी बढ़ाने की तैयारी
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 22, 2026,
  • Updated Apr 22, 2026, 8:29 AM IST

देश में चीनी की खपत अब पहले जैसी तेजी से नहीं बढ़ रही है. लोगों की खानपान की आदतों में बदलाव, हेल्थ को लेकर जागरूकता और गुड़ जैसी पारंपरिक चीजों की बढ़ती मांग ने चीनी उद्योग को नई चुनौती दी है. ऐसे समय में सरकार ने एक अहम प्रस्ताव रखा है, जो आने वाले समय में चीनी मिलों की संख्या और उनके संचालन के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है.

अब 25 किलोमीटर दूर ही लगेगी नई चीनी मिल

सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि अब किसी भी नई चीनी मिल को पहले से मौजूद मिल से कम से कम 25 किलोमीटर की दूरी पर ही लगाया जा सकेगा. अभी तक यह दूरी 15 किलोमीटर थी. यानी अब नई मिल खोलना पहले से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा. इस नियम का मकसद है कि एक ही इलाके में बहुत ज्यादा मिलें न बनें और गन्ने की उपलब्धता पर दबाव न पड़े.

राज्यों को मिलेगी ज्यादा ताकत

इस नए प्रस्ताव में एक और अहम बात यह है कि अगर कोई पुरानी चीनी मिल अपनी क्षमता बढ़ाना चाहती है, तो उसका फैसला राज्य सरकार करेगी. राज्य सरकार यह देखेगी कि उस इलाके में गन्ना पर्याप्त मात्रा में है या नहीं, किसानों को नुकसान तो नहीं होगा और आसपास की मिलों पर इसका असर कैसा पड़ेगा.

चीनी की खपत क्यों हो रही है कम?

पिछले कुछ सालों में देश में चीनी की खपत लगभग स्थिर बनी हुई है. अनुमान के मुताबिक 2025-26 में करीब 280 लाख टन चीनी की खपत हो सकती है, जो पिछले साल के आसपास ही है. हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आंकड़ा थोड़ा और नीचे जा सकता है.

इसके पीछे एक बड़ी वजह है लोगों का हेल्थ के प्रति सजग होना. सोशल मीडिया के जरिए लोग अब ज्यादा जानकारी हासिल कर रहे हैं और चीनी की जगह गुड़ या अन्य विकल्पों को अपनाने लगे हैं. यही कारण है कि चीनी की मांग में खास बढ़ोतरी नहीं दिख रही.

गुड़ और खांडसारी का बढ़ता असर

गांवों और छोटे शहरों में गुड़ और खांडसारी की मांग तेजी से बढ़ रही है. ये न केवल सस्ते हैं बल्कि इन्हें सेहत के लिए बेहतर भी माना जाता है. यही वजह है कि सरकार ने खांडसारी यूनिट्स को भी नियमों के दायरे में लाने की कोशिश की है.

देश में सैकड़ों खांडसारी यूनिट्स चल रही हैं, जिनमें से कई बड़ी क्षमता वाली हैं. अब इन यूनिट्स को भी किसानों को वही कीमत देनी होगी जो चीनी मिलें देती हैं और उन्हें तय क्षेत्रों से ही गन्ना खरीदना होगा.

किसानों और उद्योग पर क्या होगा असर?

सरकार के इस नए प्रस्ताव का असर सीधे किसानों और चीनी उद्योग दोनों पर पड़ेगा. एक तरफ इससे गन्ने की उपलब्धता संतुलित रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है. वहीं दूसरी तरफ नई मिल खोलने वालों के लिए नियम सख्त हो जाएंगे, जिससे निवेश थोड़ा धीमा पड़ सकता है. सरकार ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक किया है और 20 मई 2026 तक लोगों से सुझाव मांगे हैं. इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.

कुल मिलाकर, बदलते समय और खपत के ट्रेंड को देखते हुए सरकार चीनी उद्योग को संतुलित और टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम उठा रही है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये बदलाव किसानों, उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए कितना फायदेमंद साबित होते हैं.

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