
भारत और चीन के बीच चावल व्यापार को लेकर एक नया मामला सामने आया है. चीन ने भारत की तीन चावल निर्यात करने वाली कंपनियों के आयात लाइसेंस को रद्द कर दिया है. यह फैसला 17 अप्रैल 2026 से लागू माना जा रहा है. इससे भारतीय चावल निर्यात पर असर पड़ सकता है.
करीब एक महीने पहले चीन ने भारत से भेजे गए चावल के कुछ कंटेनरों को वापस कर दिया था. चीन का कहना था कि इन चावलों में जीएमओ (Genetically Modified Organisms) के अंश मिले हैं. इसके बाद अब चीन ने तीन कंपनियों- NM FoodImpex Pvt. Ltd., Shriram Food Industry Ltd और Sponge Enterprises Pvt Ltd- का लाइसेंस ही रद्द कर दिया है.
चीन में स्थित भारतीय दूतावास ने इस जानकारी को भारत की कृषि निर्यात संस्था APEDA को भेजा. इसके बाद APEDA ने इन कंपनियों को इसकी सूचना दी. प्रभावित कंपनियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और APEDA से मदद मांगी है, ताकि चीन से इस मुद्दे पर बात की जा सके.
चीन ने जिन कारणों से चावल को अस्वीकार किया, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में कपास को छोड़कर किसी भी जीएम फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद चावल में जीएमओ होने का दावा किया गया, जो समझ से परे है.
दिलचस्प बात यह है कि चीन खुद जीएम चावल उगाता है. साल 2006 में यूरोपियन यूनियन ने भी चीन के चावल में जीएमओ के अंश मिलने की बात कही थी.
भारत और चीन के बीच चावल का व्यापार पिछले कुछ सालों में बढ़ा है. साल 2024-25 में भारत ने चीन को लगभग 1.8 लाख टन नॉन-बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 79 मिलियन डॉलर थी. वहीं 2025-26 के चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जनवरी तक यह मात्रा बढ़कर 1.86 लाख टन हो गई, हालांकि कीमत थोड़ी कम रही.
पहले चीन ने भारत से चावल आयात पर कई पाबंदियां लगा रखी थीं. साल 2019-20 में भारत से चीन को केवल 567 टन चावल ही भेजा गया था. लेकिन 2020-21 में पाबंदियां हटने के बाद यह बढ़कर 3.3 लाख टन से ज्यादा हो गया.
जानकारों का मानना है कि अगर चीन इस तरह के फैसले जारी रखता है, तो भारत भी जवाबी कदम उठा सकता है. सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और जल्द ही चीन से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.
सीधे शब्दों में कहें तो चीन ने भारत की तीन कंपनियों से चावल खरीदना बंद कर दिया है. इससे किसानों और व्यापारियों पर असर पड़ सकता है. अब भारत सरकार इस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रही है, ताकि चावल का व्यापार फिर से सामान्य हो सके.