
महाराष्ट्र का बीड जिला सूखाग्रस्त जिले के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब इस सूखाग्रस्त जिले के किसान खेती की पारंपरिक पद्धति को छोड़कर कड़ी मेहनत और तकनीक के बल पर फलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. बीड जिले के युसुफवडगांव के किसान थलकरी परिवार ने अपने एक हेक्टेयर खेत में 3000 केले के पौधे लगाए हैं और इस किसान को 22 लाख से ज्यादा की आय होगी. किसान थलकरी ने 'आज तक' को बताया कि फिलहाल उनके 15 टन केले रूस भेजे जा रहे हैं.
बीड जिले के युसुफवडगांव का थलकरी परिवार बहुत मशहूर है. इस परिवार के पास कुल 10 एकड़ जमीन है. पहले यह परिवार खेत में गन्ना और सोयाबीन की फसल लेता था. लेकिन बारिश कम होने के कारण उत्पादन कम हो गया, जिससे खेती में आर्थिक नुकसान हुआ. इस परिवार के एक किसान ने बताया कि कृषि विभाग से मार्गदर्शन मिलने के बाद वे कोल्हापुर से 'जी नाइन' कंपनी के केले के पौधे लाए. सितंबर 2023 में उन्होंने एक हेक्टेयर क्षेत्र में 6×5 की दूरी पर 3 हजार केले के पौधे लगाए. आज केले की यह खेती लहलहा रही है और कमाई के कई रास्ते खुल गए हैं.
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किसान थलकरी के खेत में केले की पहली फसल चल रही है और रूस से उनके 15 टन केले की मांग आई है. किसान इस ऑर्डर को पूरा करने में दिन-रात लगे हुए हैं. इन्हें 23 हजार रुपये प्रति टन का दाम मिला है. एक हेक्टेयर में केला लगाने के लिए उन्होंने साढ़े चार लाख रुपये खर्च किए हैं और चूंकि उन्हें 100 टन उत्पादन की उम्मीद है, इसलिए उन्हें इससे 22 लाख से ज्यादा की कमाई होगी. कृषि विभाग से उन्हें प्रति हेक्टेयर 2 लाख 55 हजार रुपये का सब्सिडी भी मिली है.
परंपरागत खेती करने पर किसानों की आय कम और खर्च अधिक होता है. इससे बचने के लिए किसान फल और साग-सब्जी की खेती कर रहे हैं. इसी में बीड का यह परिवार भी है जिनसे कमाई बढ़ाने के लिए केले की खेती की है. इनकी खेती दूर-दूर के किसानों को प्रभावित कर रही है. फलों की फसल की लागत कम और उत्पादन अधिक होने के कारण किसान इसकी ओर रुख कर रहे हैं.
थलकरी परिवार ने बीड जिले में 200 हेक्टेयर में केले की फसल लगाई गई है. उनके बीड के केले अब विदेशों में जा रहे हैं. थलकरी परिवार की इस खेती के बारे में कृषि सहायक कमलाकर राऊत ने जानकारी दी है. बीड जिला सूखाग्रस्त जिला है जिसे देखते हुए किसान फल और सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. बारिश की मात्रा कम होने के कारण इस क्षेत्र के किसान अब नए-नए प्रयोग कर अपनी आर्थिक उन्नति कर रहे हैं. बीड का थलकरी परिवार भी इसी में एक है.