उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में अब कोल्ड ड्रिंक की जगह देसी पेय पदार्थों की मांग बढ़ गई है. बढ़ती गर्मी को देखते हुए बलिया से लेकर बनारस तक सत्तू की लस्सी (Sattu Ki Lassi) का ही क्रेज है जो चने से तैयार की जाती है. ये लस्सी पीने में काफी स्वादिष्ट होती है और बड़े ब्रांड के पेय पदार्थों से भी सस्ती है. यह पूरी तरीके से नेचुरल है. सत्तू की लस्सी बनाने वाले बच्चा लाल गुप्ता बताते हैं कि, वे 25 सालों से इस काम को कर रहे हैं. वह बनारस के पहले ऐसे लस्सी बनाने वाले थे जिन्होंने इस की परंपरा की नींव डाली. आज पूरे बनारस में लस्सी की सैकड़ों दुकानें खुल गई है. इसे पीने से गर्मी में लू नहीं लगती है. वही इसका दूसरा फायदा पाचन दुरुस्त रहता है. गैस और बदहजमी की समस्या नहीं होती है.