बिहार वेटनरी कॉलेज के प्रोफेसर ने कहा कि आज के समय में वेटनरी क्षेत्र ने काफी प्रगति की है. पहले जब सड़क नहीं हुआ करता था तो लोग पालकी पर पशु चिकित्सकों को लेकर जाते थे. पहले दो लोगो का बहुत मान सम्मान होता था. एक दरोगा का दूसरा वेटनरी डाक्टर का होता था. ये अपने अनुभव के अनुसार बताते है कि पहले मवेशी ज़्यादा हुआ करते थे.अभी बहुत कम है. वही ये कहते है कि हर प्रखंड में कम से कम दी पशु चिकित्सालय चाहिए जो आज एक है. जिसकी वजह से कई पशुपालक पशुओं का इलाज सही से नहीं करवा पाते है. वहीं जिस तरह से जिला में कृषि विज्ञान केंद्र है. उसी तरह जिला स्तर पर पशु विज्ञान केंद्र की स्थापना होनी चाहिए.तभी जाकर पशुपालक पूरी तरह से समृद्ध हो सकते है