
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखे जैसे हालात के बीच पशुओं के लिए चारे की कमी का खतरा बढ़ गया है. इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने जिले में मवेशियों की संख्या और उपलब्ध चारे का पता लगाने के लिए नया सर्वे शुरू किया है. यह सर्वे करीब एक महीने तक चलेगा. इसके आधार पर चारे की कमी वाले इलाकों की पहचान कर सरकार को रिपोर्ट दी जाएगी.
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इस साल बारिश कम हुई है. कम बारिश के कारण कई जगह सूखे जैसे हालात बन गए हैं. ऐसे में आने वाले समय में पशुओं के लिए हरे और सूखे चारे की कमी हो सकती है. पशुपालन विभाग के संयुक्त आयुक्त डॉ. पुंडलिक बोरकर ने बताया कि कम बारिश के कारण चारे की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है. इसी वजह से विभाग ने मवेशियों की संख्या और अभी मौजूद चारे के स्टॉक का नया सर्वे शुरू किया है.
पशुपालन विभाग की टीम अलग-अलग इलाकों में जाकर यह पता करेगी कि वहां कितने मवेशी हैं और उनके लिए कितना चारा उपलब्ध है. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में चारे की कमी होने की आशंका ज्यादा है. सर्वे पूरा होने के बाद करीब एक महीने में इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इस रिपोर्ट को सरकार के सामने रखा जाएगा, ताकि जरूरत के हिसाब से चारे की व्यवस्था की जा सके.
अधिकारियों के मुताबिक, पहले किसान अपने खेत के कुछ हिस्से में ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी फसलें उगाते थे. इन फसलों का इस्तेमाल अनाज के साथ-साथ पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता था. लेकिन अब खेती के क्षेत्र में बदलाव के कारण इन फसलों की बुवाई के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन कम हो गई है. इसका असर सीधे पशुओं के लिए उपलब्ध चारे पर पड़ सकता है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो चारे की कमी और बढ़ने की आशंका है.
महाराष्ट्र सरकार ने चारे की संभावित कमी को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी है. पशुपालन विभाग ऐसे किसानों को चारे के बीज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है, जिनके पास सिंचाई या अन्य माध्यम से पानी उपलब्ध है. सरकार की कोशिश है कि जहां पानी की सुविधा है, वहां किसान चारे वाली फसल उगाएं. इससे स्थानीय स्तर पर ही पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जा सकेगी और बाहर से चारा मंगाने पर निर्भरता कम होगी.
चारे की व्यवस्था में एक बड़ी चुनौती यह भी है कि महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और तेलंगाना में भी बारिश की कमी की स्थिति बताई जा रही है. ऐसे में वहां से चारा खरीदकर महाराष्ट्र लाना आसान नहीं होगा. पशुपालन विभाग अब ऐसे नए क्षेत्रों की तलाश कर रहा है, जहां से जरूरत पड़ने पर चारा खरीदा जा सके. विभाग का कहना है कि आसपास के राज्यों में भी अगर चारे की कमी रहती है तो दूसरे स्रोतों से व्यवस्था करनी होगी.
बारिश की कमी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया है. यानी राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुका सूखे की चपेट में हैं. सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए कई राहत उपायों का भी ऐलान किया है. इनमें फसल ऋण के पुनर्गठन, जमीन के राजस्व में राहत और किसानों के बिजली बिल में सब्सिडी जैसे कदम शामिल हैं.
फिलहाल पशुपालन विभाग का सर्वे यह पता लगाने पर केंद्रित है कि सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए कितना चारा उपलब्ध है और आने वाले दिनों में कितनी जरूरत पड़ सकती है. अगर समय रहते चारे की व्यवस्था कर ली जाती है तो किसानों और पशुपालकों को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है. (PTI)
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