
दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है. इसका जीवंत उदाहरण छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ग्राम भाटपाल की रहने वाली अनिता वड्डे हैं. कभी सीमित खेती और मजदूरी के सहारे जीवनयापन करने वाली अनिता आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' की मदद से वैज्ञानिक मुर्गीपालन अपनाकर 'लखपति दीदी' के रूप में नई पहचान बना चुकी हैं. उनकी सफलता आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
कुछ समय पहले तक अनिता वड्डे के परिवार की आजीविका का मुख्य आधार सीमित खेती और अस्थायी मजदूरी था. खेती से होने वाली आय परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी, जबकि मजदूरी भी नियमित रूप से नहीं मिल पाती थी.ऐसे में परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी.
विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अनिता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए नए अवसरों की तलाश शुरू की. इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़ने का अवसर मिला. यहां उन्हें वैज्ञानिक तरीके से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण, आवश्यक मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ.प्रशिक्षण से मिली जानकारी और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने मुर्गीपालन को आजीविका का माध्यम बनाया. उनकी मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयासों ने धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति बदल दी और आज वे न केवल अपने परिवार की आय बढ़ाने में सफल हुई हैं, बल्कि 'लखपति दीदी' के रूप में क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं.
अनिता राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' के अंतर्गत 'जीवन स्व-सहायता समूह' से जुड़ीं.समूह की बैठकों, बचत की आदत और वित्तीय प्रबंधन की जानकारी ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया. इसी दौरान उन्हें 'एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी)' परियोजना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से मुर्गीपालन शुरू करने का फैसला किया.
आईएफसी क्लस्टर के तहत मिले प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग की मदद से अनिता ने 1,500 चूजों की ब्रूडिंग शुरू की. संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने स्थानीय किसानों को गुणवत्तापूर्ण चूजों की आपूर्ति शुरू की. इस पहल से उन्हें शुरुआती चरण में ही करीब 16 हजार रुपये की शुद्ध आय हुई.
शुरुआती सफलता से उत्साहित अनिता अब अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही हैं. उनका लक्ष्य मुर्गीपालन के जरिए हर महीने 30 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित करना है.
आज अनिता वड्डे का परिवार आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर है. वे सिर्फ अपने परिवार की तकदीर बदलने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं. उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही अवसर, सरकारी योजनाओं का लाभ और मजबूत इरादे के दम पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिख सकती हैं.
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