मछली (सांकेतिक तस्वीर)महाराष्ट्र के पुणे जिले में गैर-कानूनी तरीके से पाली जा रही अफ्रीकन मछली का भंडाफोड़ हुआ है. दरअसल, महाराष्ट्र फिशरीज डिपार्टमेंट ने पुणे में उजानी जलाशय के बैकवाटर से गैर-कानूनी तरीके से पाली जा रही 2.4 टन अफ्रीकन कैटफिश जब्त की है और उसे नष्ट कर दिया है. इस मामले की जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी. डिपार्टमेंट की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक, यह कार्रवाई गुरुवार को इंदापुर के कलथान नंबर 2 गांव में तब की गई जब अधिकारियों ने पाया कि मछली फार्म मालिकों को पहले से दी गई चेतावनी के बावजूद वो बैन की गई अफ्रीकन प्रजाति की मछली पाल रहे थे. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ फिशरीज़ अर्चना शिंदे की लीडरशिप में एक टीम ने यह ऑपरेशन किया.
बता दें कि अफ्रीकन कैटफ़िश, जिसे आमतौर पर अफ्रीकन मांगुर के नाम से जाना जाता है, उसको एक इनवेसिव एलियन प्रजाति माना जाता है, जिसे गांव वाले इलाकों में पालन करने के लिए बैन कर दिया गया है, क्योंकि यह देसी मीठे पानी की बायोडायवर्सिटी और वेटलैंड इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा खतरा मानी जाती है. ये प्रजाति पर्यावरण और पक्षियों के लिए काफी खतरनाक मानी जाती है.
ऑपरेशन के दौरान बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने साइंटिफिक मदद दी. वेटलैंड इको-रेस्टोरेशन एंड फिशरीज डेवलपमेंट प्रोग्राम के हेड डॉ. उन्मेश जी कटवाटे की टीम ने जब्त की गई मछलियों की टैक्सोनॉमिक पहचान कन्फर्म की. BNHS के रिसर्चर्स ने पानी के सैंपल भी इकट्ठा किए और गैर-कानूनी एक्वाकल्चर एक्टिविटीज़ के असर का पता लगाने के लिए इकोलॉजिकल असेसमेंट करेंगे.
कटवाटे ने कहा कि ऑर्गनाइजेशन जब्त की गई मछलियों पर लैब टेस्ट कर रहा है, ताकि माइक्रोप्लास्टिक और हेवी मेटल जैसे कॉन्टैमिनेंट्स का पता लगाया जा सके, जो अक्सर अनरेगुलेटेड एक्वाकल्चर प्रैक्टिस से जुड़े होते हैं.उजानी रिजर्वॉयर, जिसे एक इंपॉर्टेंट बर्ड एरिया (IBA) माना जाता है, उनमें माइग्रेटरी और रेज़िडेंट पक्षियों की बड़ी आबादी रहती है. अधिकारियों ने कहा कि अफ्रीकन मांगुर के आने से वेटलैंड की पूरी फ़ूड चेन में रुकावट आ सकती है.
असिस्टेंट कमिश्नर शिंदे ने पूरे महाराष्ट्र में मछली पालने वालों से अपील की है कि वे बैन की गई मछलियों को पालना बंद करें. इसके अलावा डिपार्टमेंट द्वारा प्रमोट किए गए लीगल ऑप्शन अपनाएं, और उन्हें भरोसा दिलाया है कि सही और फ़ायदेमंद ऑप्शन मौजूद हैं.
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