
यूरोप और उत्तरी अमेरिका में इस बार बर्ड फ्लू के मामले असामान्य रूप से जल्दी सामने आ रहे हैं. इससे पोल्ट्री सेक्टर में दोबारा बड़े संकट की आशंका बढ़ गई है. पिछले वर्षों में इसी वायरस के कारण करोड़ों मुर्गियों को मारकर नष्ट करना पड़ा था और मांस-अंडे के दाम उछल गए थे. इंसानों में संक्रमण अभी भी बेहद कम है. आमतौर पर प्रवासी पक्षियों की आवाजाही के साथ शरद ऋतु में संक्रमण बढ़ता है, लेकिन इस बार यूरोप और अमेरिका दोनों जगह मामलों की संख्या जल्दी और ज्यादा दिखी है.
जंगली पक्षियों के साथ-साथ पोल्ट्री फार्म भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. अमेरिका में 18 नवंबर तक 107 केस दर्ज हुए, जो पिछले साल की तुलना में लगभग चार गुना हैं. देश के सबसे बड़े टर्की उत्पादक राज्य मिनेसोटा में इस बार संक्रमण दो महीने पहले पहुंच गया है. मिशिगन के कृषि विभाग के प्रमुख टिम बोरिंग ने कहा कि यह सिलसिला कई सालों से चल रहे लंबे प्रकोप का हिस्सा है.
अमेरिका में सितंबर से अब तक करीब 80 लाख पक्षियों को नष्ट किया जा चुका है. कनाडा में भी लगभग इतने ही पक्षियों को मारना पड़ा. वहीं, कनाडा के कृषि मंत्री हीथ मैकडॉनल्ड का कहना है कि जंगली पक्षी वायरस को ज्यादा मात्रा में ढो रहे हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक हो गई है.
विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने शुरुआती घटनाओं को गंभीर जरूर बताया, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर किसी बड़े खतरे से इनकार किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के मौजूदा रूप और व्यवहार पर नजर रखे जाने की जरूरत है.
यूरोप में हालात और खराब दिख रहे हैं. केवल सितंबर से नवंबर के बीच जंगली पक्षियों में 26 देशों में 1,443 मामले पहचाने गए, जो पिछले साल की तुलना में चार गुना अधिक हैं. जर्मनी में तीन वर्षों में सबसे ज्यादा संक्रमण दर्ज हुए हैं.
फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी एंसेस (ANSES) के अनुसार, इस बार जिस तरह के पक्षी पहले संक्रमित हुए हैं वह पैटर्न भी बदला है. सामान्यतः जलपक्षी जैसे बतख-हंस बाद में प्रभावित होते हैं, लेकिन इस बार अपेक्षाकृत जल्दी उड़ान भरने वाले कॉमन क्रेन से संक्रमण का फैलाव शुरू हुआ और उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम यूरोप तक तेजी से फैल गया.
फ्रांस ने अक्टूबर में ही अपने पोल्ट्री क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा था. एशिया में कंबोडिया को छोड़कर स्थिति सामान्य है. कंबोडिया में प्रकोप बढ़ा हुआ है. वहीं, जापान में पहला मामला 22 अक्टूबर को मिला था और अब तक करीब 16.5 लाख पक्षियों को मारकर नष्ट किया जा चुका है. (रॉयटर्स)