एक्सपर्ट की मानें तो पशुपालन अगर प्लानिंग के साथ किया जाए तो मुनाफा जरूर होता है. ये प्लानिंग पशुओं की देखभाल, उनकी खुराक और उनकी हैल्थ के साथ-साथ बाजार से भी जुड़ी होती है. क्योंकि कोई भी प्रोडक्ट तैयार करने के साथ ही उसके लिए अच्छा बाजार तलाशना भी जरूरी होता है. बकरीद पर बिकने वाले बकरों के बारे में भी गोट एक्सपर्ट कुछ ऐसी ही सलाह देते हैं. गौरतलब रहे बकरी पालन में सबसे बड़ा बाजार बकरीद पर लगता है. मुश्किल से 20 दिन में ही ढाई करोड़ से ज्यादा बकरे बिक जाते हैं. आम दिनों में बिकने वाले और बकरीद के मौके पर बिकने वाले बकरों में फर्क होता है, यही वजह है कि बकरीद पर बिकने वाले बकरे मुंह मांगे दामों पर बिकते हैं.
यही वजह है कि इस दौरान मुनाफा ज्यादा होने की उम्मीद रहती है. इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सालभर में कुछ मौके ऐसे आते हैं जब बाजार में बकरों की बहुत डिमांड होती है. इसमे बकरीद के साथ-साथ दुर्गा पूजा भी खास है. खासतौर पर बकरीद पर बकरे बेचकर पशुपालक अपना पूरे सालभर का खर्च निकाल लेते हैं. लेकिन ये तब मुमकिन है जब गोट एक्सपर्ट के मुताबिक अभी से आने वाली बकरीद के लिए बकरे पाले जाएं.
बकरा पालने के लिए अपनाएं ये तरीका
- बकरीद के लिए लोग 2 से 3 महीने का बकरा (बच्चा) लाकर पालते हैं.
- इस बच्चे की कीमत 4.5 से 5 हजार रुपये तक होती है.
- इसके बाद 9 से 10 महीने इस बच्चे को पाला जाता है.
- पालने के दौरान एक बच्चे की खुराक, दवाई आदि पर सात से आठ हजार रुपये की लागत आती है.
- एक्सपर्ट के मुताबिक बकरीद के बकरा को सिर्फ खुले मैदान की चराई पर ही नहीं रख सकते हैं.
- घर में बच्चे को जौ-चना जैसा दाना और मिनरल् मिक्चर भी खिलाना होता है.
- इस तरह एक साल बाद बकरी का बच्चा 12 से 13 हजार रुपये की लागत में तैयार हो जाता है.
- बकरीद के लिए पाले जा रहे बकरे पर आने वाली लागत को और कम किया जा सकता है.
- बकरी पालकर उससे बच्चे लिए जाएं तो एक साल के बकरे की लागत कम आएगी.
- बकरियों की कई नस्ल ऐसी हैं जो एक साल में दो बार तक बच्चे देती हैं.
- इस तरह एक साल में बकरी के बच्चों की संख्या चार से पांच हो जाती है.
- तीन महीने तक तो बकरी के बच्चों को सिर्फ दूध पिलाना होता है.
- एकसपर्ट के मुताबिक इस दौरान सिर्फ बकरी को ही चारा खिलाने का खर्च आएगा.
- चारा खाने वाली उस बकरी पर दो से तीन बच्चे पल जाते हैं.
- बाजार से दो बच्चों को खरीदने का खर्च 9-10 हजार रुपये बच जाएंगे.
- बच्चा तीन महीने तक बकरी का दूध पिएगा तो उसकी ग्रोथ भी अच्छी होगी.
- एक साल में मोटा ताजी दिखाई देने लगेगा और मीट भी क्वालिटी का बनेगा.
बकरे तैयार हों तो यहां बिकते हैं जल्दी
- देश के स्थानीय बाजारों में सालभर बकरे के मीट की डिमांड रहती है.
- कोलकाता में दुर्गा पूजा के मौके पर यूपी, एमपी और राजस्थान से बकरे जाते हैं.
- बकरीद के मौके पर खासतौर से उत्तर भारत से देशभर में बकरे सप्लाई होते हैं.
- बकरीद से कई दिन पहले लाखों की संख्या में बकरे खाड़ी देशों को जाते हैं.
- रोजाना की डिमांड पूरी करने के लिए भी अरब देशों में बकरे भेजे जाते हैं.
- बकरीद के मौके पर बकरों की बड़ी मंडी यूपी, एमपी, राजस्था और हरियाणा में लगती है.
- जसवंत नगर (यूपी), कालपी (मध्य प्रदेश), महुआ, अलवर (राजस्थान) और मेवात (हरियाणा) में.
- यहां से देश ही नहीं विदेशों की डिमांड भी पूरी की जाती है.
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